‘‘चले जाओ यहाँ से, तुम्हें भीख देने के लिए न हमारे पास फुरसत है और ना ही छुट्टा।’’ एक बुद्धिजीवी बोला।
‘‘तुम एक हट्टे-कट्टे नौजवान हो। कुछ काम क्यों नहीं करते?’’ दूसरा बुद्धिजीवी बोला।
‘‘देखो भाई, ना तो तुम बीमार दिखते हो, ना ही अन्धे-लूले-लंगड़े और ना ही तुम बूढ़े हो। फिर तुम्हें भीख क्यूं दें? आखिर भीख देने के लिए कोई तो वजह चाहिए न?’’ तीसरा बुद्धिजीवी बोला।
‘‘वजह? वजह तो भीख न देने के लिए चाहिए। भीख देने के लिए कोई वजह नहीं होती। मेरा भिखारी होना पर्याप्त है।’’
यह कह चौथा बुद्धिजीवी अपनी हथेली समेटता हुआ आगे बढ़ गया।
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