मैथिली लघुकथा
पिता आ पुत्रमे कोन ने कोन बाते मतान्तर भेलनि । से बेटा बहुत तमसा गेलनि। बात – चीत बन्न नहि भेलनि, आ नहि कोनो तेहन झगड़े – झॉटी। मन मोटाव धरि बनले रहल।
पाइ जे बेटा मासे – मास पठबैत छलनि से बन्न, एकदम बन्द क’ देलकनि। मास- दूं मास, पॉच मास आ बरख, कए बरख तक बन्द। एको टा पाइ नहि दैत छथिन ओ।
एम्हर बुढ़ी कहैत रहैत छथिन बुढ़ाकें – जे अहॉ किएक नहि कहैत छियैक ओकरा पाइ दैक लेल। ओकरा पाइ देमय पड़तैक। मुदा बूढ़ा चुप्प। ओ कहियो नहि कहलथिन – जे पाइ पठा। दिक्कत त’ होइते रहनि। आ एक दिन पिताकें फोन एलनि बेटाक, फोन त’ आनो दिन अबैत रहनि कहियो काल क’ । कुशल – समाचार टा होइत रहनि। मुदा ओहि दिन जे फोन एलनि से बेटा कहने रहथिन – अहॉक बैंक एकाउंमे तीन हजार रुपया पठा देलहुं हें।
पिता कनिये जोरसॅ कहने रहथिन – ठीक छैक। दोसर मास पुत्र फोन केलथिन जे एकाउंटमे पाइ पठा देलहुं हें। पिता एहि बेर जोरसॅ कहने रहथिन, बहुत बढ़िया, बहुत बढ़िया, कालि्हये डॉक्टरसॅ देखा क’ एलहुं हें, पाइ द्वारें दबाइ नहि अनने रही!
पिता आ पुत्रमे जीत ककर भेलैक से कहॉ कियो बुझि रहल छथि!
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