जून 2026

देशान्तरदर्पण झूठ नहीं बोलता     Posted: May 1, 2021

यूएई के लेखक-असगर ज़हीर (अनुवाद-आलोक कुमार सातपुते)

एक लंबे समय के बाद आईने का एक टुकड़ा उसके हाथ लग। वह उस टुकड़े में खुद को गौर से देखने लगा। उसने देखा कि दर्पण में एक बेहद बदसूरत आदमी है।उसकी एक लंबी सी बेतरतीब दाढ़ी है। उसकी मूँछें भी गंदी सी है। उसने अपनी नाक को छुआ और ध्यान से देखा। अरे हाँ! यह नाक तो मेरी ही है, पर यह बदसूरत सा चेहरा किसका है?” वह केवल अपनी बड़ी नाक को ही पहचान पाया जिसे हमेशा लोगों ने सराहा। “मुझे इस बदसूरत चेहरे की इच्छा नहीं है। ऐ आईने तू मुझे मेरी नाक के अलावा बाकी चेहरा क्यों दिखा रहा है?ऐसा कहते हुए वह भड़क उठा और अपनी पूरी ताकत से उसने आईने के उस टुकड़े को फेंक दिया। “खुदा का शुक्र है कि तुम्हारी नाक अभी भी सही सलामत तुम्हारे चेहरे पर है वरना यहां तो कई चेहरे बहुत सुंदर हैं, लेकिन किसी भी चेहरे पर नाक ही नहीं है। आईना उनके चेहरे पर नाक को नहीं लगा सकता है।दुनिया में सिर्फ एक आईना ही है, जो सबकुछ सच बोलता है। ” उसकी अंतरात्मा ने उन्हें यह कहकर संतुष्ट कर दिया।
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