रोज की तरह कुसुम और मयंक रात को जब गेट के बाहर रोटी रख रहे थे,तमी एक
सज्जन ने उन्हें आवाज़ लगाई और पास आकर कहा- ‘मैं अपके सामने रहता हूँ। आप अब रोटी यहाँ मत रखा कीजिए। आप की रोटी खाने वाला लड़का अब नहीं रहा…कल रात आपकी रखी रोटी लेकर जैसे ही वह झूमता हुआ सड़क पार कर रहा था, वैसे ही तेजी से आते एक ट्रक ने उसे टक्कर मार दी और उसने दम तोड़ दिया।‘ यह सुनकर हतप्रभ मयंक और कुसुम उसका मुँह देखने लगे।
मयंक ने कहा – भा’ ई साहब ,हम तो रोटी कुत्ते टोनी के लिए रखते थे ।
सज्जन ने कहा- टोनी तो कई दिन पहले ही ऐक्सिडेंट में मर चुका है।
कुसुम बोली -पर भाई साहब हम हर रोज रोटी रख कर आवाज़ लगाकर चल देते.वो भों- -भों-भो की आवाज़ निकलते आ जाता, भों -भों कुत्ते की आवाज़—-.!
उन सज्जन ने कहा- कोई बड़ी बात नहीं बहन,पेट क्या नहीं कराता,कला या तो जरूरत से या शौक से उपजती है ….और
यहाँ तो बात रोटी की थी…
प्रवीण राही, मुरादाबाद (उप्र)…