चलती हुई बस को एक यात्री ने हाथ दिया, बस रुक गई, यात्री बैठ गया। थोड़ी दूर चलने पर, एक और यात्री ने बस को रुकने का इशारा किया, बस रुक गई, दूसरा यात्री भी बैठ गया।
दूसरे यात्री के बस में बैठते ही, पहला यात्री बड़बड़ाया, ‘‘हुँ ह…सिटी बस तो भी इससे अच्छी होगी। जहाँ चाहा, वही रोक दिया। बाप की गाड़ी….।’’
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अक्तुबर 2026
संचयनमानदंड Posted: May 1, 2015
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