जॉनी कहाँ मर गया। हरामखोरी की आदत लग गई हैं सबको यहां।
आया मालिक।
कहां मर गया था। काम कौन तेरा बाप करेगा।
चल बे जाके टेबल नं 3 पर आॅर्डर लेके आ।
उस छोटे से बच्चे को देखकर मन में कितने सवाल उठ रहे थे। कितनी फुर्तीला था । सबसे आॅर्डर ले रहा था ओर खाना भी फटाफट दे रहा था। ऐसे लग रहा था मानो कोई चाबी भर दी हो। जाने क्या असर तो मालिक की कर्कश–सी फटकार में। सोच रही थी कि कब मेरी टेबल पर आकर आॅर्डर लेगा।
मैडम जी…क्या लेंगी आप?
क्या नाम है तुम्हारा?
जॉनी बोलते है अपने को यहाँ सब।
जॉनी कितने साल के हो?
9 साल का है मैडम जी।
तुम स्कूल क्यों नहीं जाते? कितने सारे सरकारी स्कूल है , जहाँ फीस भी नहीं लगती ओर खाना भी मिलता हैं। किताबें, स्कूल के कपडे़ सब वहीं से मिलता हैं। फिर क्यों यहाँ काम करते हो। पढ़ाई करोगे तो ये काम नहीं करना पड़ेगा। फिर तुम भी सबको आॅर्डर दोगे।
मैडम जी, स्कूल में किताबें, खाना सब मिलता हैं पर पैसा तो नहीं मिलता ना। हम स्कूल जाएगा तो कमाएगा कौन। कमाएगा नही ,तो मां का ध्यान कौन रखेगा उसका दवा कौन ला के देगा।
मैडम जी, अब जल्दी से आर्डर दीजिए, नहीं तो फिर से गाली सुनने को मिलेगा।
इस मासूम जवाब ने कई सारें सवाल खड़े दिए।
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नीतू शर्मा , 1916, खेजारो का रास्ता , चाँदपोल बाज़ार , जयपुर-302001
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जून 2026
देशमासूम सवाल Posted: May 1, 2015
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