वो बिकुल बदरंग था, बिलकुल असंगत मुद्रा
कुछ आधा कुछ अधूरा, बिलकुल भदेस
एक हाथ लम्बा एक छोटा
एक आँख खुली एक बंद
एक कान गायब
माथे पर पट्टी
आधा सर मुंडा हुआ
एक हाथ में प्लास्टर दूसरे हाथ में कटोरा
मैंने पूछा – भैया, ये क्या स्वांग बनाये हुए हो, कौन हो तुम
वो बोला पहले तीसरा मोर्चा था अब गठबंधन हूँ .
मैं – क्या मतलब
वो – दरअसल मैं विभिन्नता और विपक्ष में एकता का प्रतीक हूँ
मैंने पूछा – लेकिन एकता है कहाँ ?
वो – फ़िलहाल तेल लेने गई है ..
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उर्मिल कुमार थपलियाल,ए – 1075/3, इन्दिरा नगर,लखनऊ – 226016