जुलाई 2026

देशान्तरमनःस्थिति     Posted: April 1, 2019

मिकोला और सार्गेइका स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे। स्कूल में टीचर ने सार्गेइका से जो प्रश्न पूछे थे, उनका उसने सही जवाब दिया था और सबसे ज्यादा अंक पान पर शाबाशी भी पाई थी, जबकि मिकोला सही जवाब न दे पाने पर कम अंकों और डांट का भागीदार बना था।

यह दिन सुन्दर बसन्त का दिन था। सूरज पूरी तेजी से चमक रहा था और मिकोला मुँह फुलाए उदास चला जा रहा था।

दाईं ओर से उड़कर आते हुए बादल को देखकर सार्गेइका चहका, ‘‘आह, कितना सुन्दर बादल है, बिल्कुल सफेद गुलाब की तरह। कितनी कोमल और नाजुक पंखुडि़याँ हैं इसकी।’’

मिकोला काफी देर तक बादल को घूरता रहा और फिर धीरे से बोला,‘‘कहाँ हैं पंखुडि़याँ……कहाँ है सुन्दर सफेद गुलाब…..मुझे तो वह एक भेड़िए जैसा दिखाई दे रहा है….वो देखो, उसका सिर कितना भयानक लग रहा है।….अरे ……अरे…..वह तो मुँह खोल रहा है!’’

एक दूसरे की कल्पनाएँ न समझते हुए दोनों आपस में एक–दूसरे का मुँह देखते रह गए।

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