‘उफ सब मजा किरकिरा कर दिया’ स्वयंप्रभाजी ने नान को प्लेट से सरका कर वापस डलिया में रख दिया ।‘दूसरी बार कहा है ,जरा करारी सेक कर लाओ पर यह बैरा भी न कच्ची पक्की रोटी लेकर आ जाता है । ’
‘छोड़ो दूसरी मँगाता हॅूं’।’ श्रीमंतजी बोले ,
‘हम भी करारी ही लेंगे, ’ दोनों बच्चों ने भी प्लेट की नान छोड़ दी ।
‘अरे ! ये पास्ता कौन खायेगा ?’ स्वयंप्रभाजी ने दोनों बच्चों की ओर देखा ।
‘नो मामा नो दाल मखनी मँगाओ ’
‘उफ पहले ये तो खालो ’श्रीमंतजी ने कहा ।
‘पापा प्लीज बटरनॉन खाना है,’ बच्चों के चेहरे लटक गए थे ।
‘बैरा बटरनान और एक दाल मखनी ले आओ । देखो पतली और अच्छी सिकी लाना,’ श्रीमंतजी को बच्चों पर लाड़ आ गया । गरम बटरनॉन और दाल मखनी खाकर बच्चे टैरेस पर हो रहे कठपुतली का शो देखने चले गये।’ श्रीमंतजी ने बैयरे से बिल लाने को कहा । स्वयंप्रभाजी ने बचा हुआ खाना देखा एक क्षण ठिठकी और बोली ,‘डॉगी पैक बनादो ।’
श्रीमंत जी ने पत्नी की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा। इशारे से स्वयंप्रभाजी ने रुकने का इशारा किया । वेटर के जाने के बाद श्रीमंतजी बोले,‘ हमारे यहॉं कुत्ता कहॉं है ?’
‘अरे ऐसे ही कहा जाता है । घर जाकर बाबूजी के लिए खाना नहीं बनाना पड़ेगा ।’
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