पुत्र के मन में अच्छे संस्कारों का निर्माण हो, इसलिए वे उसे मातृ–पितृ भक्त श्रवण कुमार की कहानी सुना रहे थे। अभी कहानी आधी ही हुई थी कि उन्हें अपने वृद्ध पिता की पुकार सुनाई दी। लेकिन वे उसे सुनी अनसुनी करके कहानी सुनाते रहे। जब तीन बार ऐसा हुआ तो पास में लेटी पत्नी बोली, ‘‘वो…पिताजी पुकार रहे हैं ना।’’
इस पर वे झल्लाए, ‘‘पिताजी को तो बुढ़ापे में आवाज लगाने की लत पड़ गई है।’’
‘‘उनकी दवाई का समय हो गया है।’’ पत्नी बोली।
‘‘दवाई में दो मिनट की देर हो जाएगी तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा…..मैं कहानी पूरी करके ही जाऊँगा।’’ इतना कहकर वे पुन: पुत्र को श्रवणकुमार की कहानी सुनाने लगे।