नवम्बर 2026

देशशब्दवीर     Posted: November 1, 2026

पुत्र के मन में अच्छे संस्कारों का निर्माण हो, इसलिए वे उसे मातृ–पितृ भक्त श्रवण कुमार की कहानी सुना रहे थे। अभी कहानी आधी ही हुई थी कि उन्हें अपने वृद्ध पिता की पुकार सुनाई दी। लेकिन वे उसे सुनी अनसुनी करके कहानी सुनाते रहे। जब तीन बार ऐसा हुआ तो पास में लेटी पत्नी बोली, ‘‘वो…पिताजी पुकार रहे हैं ना।’’

इस पर वे झल्लाए, ‘‘पिताजी को तो बुढ़ापे में आवाज लगाने की लत पड़ गई है।’’

‘‘उनकी दवाई का समय हो गया है।’’ पत्नी बोली।

‘‘दवाई में दो मिनट की देर हो जाएगी तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा…..मैं कहानी पूरी करके ही जाऊँगा।’’ इतना कहकर वे पुन: पुत्र को श्रवणकुमार की कहानी सुनाने लगे।

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine