नवम्बर 2026

चर्चा मेंउज्जैन में लघुकथा विषयक कार्यक्रम     Posted: November 1, 2026

लघुकथा  सुलाने  की  नहीं , जगाने  की विधाः डॉ. शैलेन्द्र  कुमार  शर्मा  

 नवगठित ‘उज्जैन लघुकथा  मंच’ द्वारा प्रेमचंद  पुण्य  स्मरण  दिवस  आयोजित
उज्जैन |’लघुकथा  सुलाने  की  नहीं , जगाने  की  विधा  है ।आज  लघुकथा  साहित्यकाश में  उच्च  स्थान  पर  है  ऐसे  मे  ‘उज्जैन  लघुकथा  मंच’ का  गठन  उज्जैन के लघुकथा जगत में नयी आशा है|’ उक्त विचार सम्राट  विक्रमादित्य  विश्वविद्यालय  के  कुलानुशासक, ख्यात  समालोचक डॉ शैलेन्द्र कुमार शर्मा  ने  भारतीय  ज्ञानपीठ  में  नव  गठित  संस्था  ‘उज्जैन  लघुकथा  मंच  के  प्रथम  आयोजन  में  व्यक्त  किए । प्रेमचंद  का  स्मरण  करते  हुए  उन्होंने कहा  कि प्रेमचंद  ने  उस  समय समाज की पीड़ाओं में उपभोक्ता  के  दर्द  को भी पहचाना  था  और  उपभोक्ता  विमर्श  पर  लघु रचनाएँ  लिखी  थीं | उन्होंने  प्रेमचंद  की  दो  लघुकथाओं  –   ‘कश्मीरी  सेब’  और ‘देवी’  का  पाठ  भी  किया ।


 जानकारी  देते  हुए  संस्था  के  डॉ. हरीश  कुमार  सिंह  ने   बताया  कि  कार्यक्रम के  अध्यक्ष  वरिष्ठ  लघुकथाकार डॉ. प्रभाकर  शर्मा  ने  अपने  उद्बोधन  में उज्जैन के  समृद्ध लघुकथा  इतिहास की  बात की। प्रेमचंद  सृजन  पीठ  के  निदेशक  तथा  लघुकथा  मंच  के  संरक्षक मुकेश  जोशी  ने   संस्था के  गठन पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि लघुकथा का आकाश अनन्त है|कार्यक्रम  का  संचालन, संयोजक सन्तोष  सुपेकर  ने  किया  । चेन्नई  से  प्रोफेसर  बी.  एल. आच्छा ने  अपने  संदेश  में  कहा  कि ‘उज्जैन लघुकथा मंच’ लघुकथा के क्षेत्रीय भूगोल का राष्ट्रीय संस्कार है और उसकी आरंभिक सक्रियता आश्वस्त करती है।    लघुकथा आज सृजन के केन्द्र में है। चेन्नई में रहकर भी उज्जैन की हलचल समुद्री लहर की तरह स्पंदित कर जाती है।इस  अवसर  पर  नगर  के  लघुकथाकारों  सर्वश्री  मानसिंह  ‘शरद’,  डॉ.  क्षमा  सिसौदिया,  डॉ. रूपा  भावसार, रामचन्द्र धर्मदासानी, आशागंगा शिरढ़ोणकर, डॉ.  नेत्रा रावणकर  ,डॉ.वंदना  गुप्ता,  डॉ माया  बदेका ,जी. के. निगम, डॉ.  संजय  नागर, डॉ स्वामीनाथ पांडे, राजेंद्र नागर निरंतर ,वंदना  नागर,  डॉ.चित्रा जैन तथा दिलीप  जैन  ने  अपनी  प्रभावी  लघुकथाओं  का  पाठ  किया |   पठन-पाठन को  बढावा  देने  के  लिए इस  अवसर  पर  सदस्यों  को पुस्तक  समीक्षा  हेतु   विभिन्न  लेखकों  के  लघुकथा  संग्रह भी भेंट  किए  गये |प्रारम्भ  में  सरस्वती  वंदना जी .के. निगम  ने  प्रस्तुत  की ,अतिथि  स्वागत  प्रदीप  ‘सरल’ तथा  अजय  सूर्यवंशी ने  किया  और  आभार  मानसिंह ‘शरद’ ने  माना |
       डॉ. हरीश कुमार सिंह ,संरक्षक,  उ.ल.म.  9424581195

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