नवम्बर 2026

चर्चा मेंअमृतसर में दो दिवसीय 31वाँ अंतरराज्यीय लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न     Posted: November 1, 2026

अमृतसर में दो दिवसीय 31वाँ अंतरराज्यीय लघुकथा सम्मेलन/ मिन्नी कहानी समारोह आयोजित हुआ।मिन्नी कहानियों का पाठ, पुस्तकों का लोकार्पण, नाटक और सम्मान समारोह रहा आकर्षण का केंद्रअमृतसर: मिनी कहानी लेखक मंच (रजि.) तथा अदारा ‘मिनी मैगज़ीन’ द्वारा दो दिवसीय 31वाँ अंतरराज्यीय मिनी कहानी समारोह, अदारा ‘अपनी आवाज़’ तथा ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसाइटी (रजि.), अमृतसर के सहयोग से मानांवाला ब्रांच पिंगलवाड़ा, अमृतसर के माता मेहताब कौर हॉल में आयोजित किया गया। इस समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों से मिन्नी कहानी लेखक, आलोचक एवं साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।

समारोह के पहले दिन के उद्घाटन सत्र में ‘साहित्य का असल प्रयोजन और सार्थकता’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. मनजिंदर सिंह, प्रमुख, पंजाबी विभाग, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर शामिल हुए। सत्र के अध्यक्ष मंडल में सुरिंदर सिंह सुन्नड़, मुख्य संपादक ‘अपनी आवाज़’ मैगज़ीन, डॉ. कुलदीप सिंह, चेयरपर्सन, पंजाबी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, डॉ. राम मूर्ति, संपादक ‘अपनी आवाज़’ तथा हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान डॉ. अशोक भाटिया शामिल थे।

समारोह का शुभारंभ डॉ. भवानी शंकर गर्ग ने दिवंगत शायर सुरजीत पातर की ग़ज़ल गाकर किया। मंच के संरक्षक हरभजन सिंह खेमकरणी ने स्वागत शब्द कहे। मंच के प्रमुख जगदीश राय कुलरियाँ ने मंच के उद्देश्यों, कार्यों तथा ‘मिन्नी मैगज़ीन’ के सफर पर प्रकाश डालते हुए समारोह की रूपरेखा साझा की।इसके पश्चात डॉ. मनजिंदर सिंह ने मुख्य भाषण देते हुए मानव जीवन में साहित्य के वास्तविक उद्देश्य के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भारतीय दर्शन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बातें रखते हुए कहा कि साहित्य मनुष्य को स्वयं को पहचानने में सहायता करता है। इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि साहित्य मनुष्य की चेतना को झकझोरने में मदद करता है। डॉ. राम मूर्ति और डॉ. अशोक भाटिया ने गंभीर बिंदु उठाकर इस चर्चा को सार्थक ऊँचाई तक पहुँचाया।सुरिंदर सिंह सुन्नड़ ने कहा कि वर्तमान समय में मिल-बैठकर इस तरह के साहित्यिक समारोह आयोजित करना और साहित्य पर संवाद करना अपने आप में बड़ी बात है, जो मनुष्य के जीवित और संवेदनशील होने का प्रमाण है। उन्होंने लेखकों को लोकहितकारी साहित्य की रचना करने के लिए प्रेरित किया।इसी दौरान ‘मिन्नी मैगज़ीन’ का नया अंक, मासिक मैगज़ीन ‘अपनी आवाज़’ का अक्टूबर अंक, डॉ. श्याम सुंदर दीप्ति का मिन्नी कहानी संग्रह ‘सत्तरवाँ बसंत’, दर्शन सिंह बरेटा का विचार संग्रह ‘सुच्चे मोतियों की माला’ तथा करनाल से पधारे सुशील चावला का लघुकथा संग्रह ‘ज़िंदगी के रंग’ लोकार्पित किया गया।इस सत्र में मिन्नी कहानी के प्रतिबद्ध लेखक बिक्रमजीत नूर को जीवनभर मिन्नी कहानी के लिए किए गए कार्यों के लिए ‘श्री दर्शन मितवा यादगारी मिन्नी कहानी लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार-2025’ तथा पंजाब साहित्य अकादमी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. सरबजीत कौर सोहल को मिन्नी कहानी विधा के विकास के लिए किए गए प्रयासों हेतु ‘कॉमरेड जसवंत सिंह कार शिंगार यादगारी मिन्नी कहानी विकास पुरस्कार-2025’ प्रदान किया गया।

इस सत्र में सीमा वर्मा तथा एडवोकेट तिरपता बरमौता ने अपनी-अपनी मिन्नी कहानियों का पाठ किया।समारोह का दूसरा सत्र मिन्नी कहानी पाठ एवं चर्चा पर आधारित था। इसकी अध्यक्षता डॉ. सरबजीत कौर सोहल, हरभजन सिंह खेमकरणी, डॉ. हरजिंदरपाल कौर कंग तथा अशोक दर्द (हिमाचल) ने की, जबकि प्रसिद्ध आलोचक एवं लेखक डॉ. प्रदीप कौड़ा विशेष टिप्पणीकार के रूप में शामिल हुए।इस सत्र के आरंभ में मंच के अध्यक्ष डॉ. श्याम सुंदर दीप्ति ने ‘मिन्नी’ के चार दशकों के सफर तथा सहयोगियों के साथ इसके संबंधों पर चर्चा की। इसके बाद मिन्नी कहानियों के पाठ का दौर शुरू हुआ, जिसमें शौकीन सिंह, गुरमीत सिंह मराड़, कुलदीप कौर मक्कड़, सीमा भाटिया, सुखविंदर दानगढ़, कविता राजबंस, परवीन अवी, दविंदर पटियालवी, सुरिंदर कैले, कुलविंदर कुमार बहादुरगढ़, परमजीत कौर शेखूपुर कलां, विवेक, सुशील चावला, राजिंदर माज़ी, तिरलोक ढिल्लों, डॉ. दविंदर कौर खुश धालीवाल तथा रणजीत आज़ाद कांझला ने अपनी-अपनी मिन्नी कहानियों का पाठ किया।इन मिन्नी कहानियों पर चर्चा करते हुए डॉ. प्रदीप कौड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में मिन्नी कहानी जहाँ नई मंजिलों की ओर बढ़ रही है, वहीं उसके सामने कई बड़ी चुनौतियाँ भी हैं, जिनके बारे में लेखकों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। डॉ. सोहल ने कहा कि इस विधा ने अपनी सार्थकता सिद्ध की है और आने वाले समय में इसमें और भी संभावनाएँ हैं।

इस सत्र के दौरान श्रीमती अंतरा करवड़े, इंदौर (मध्य प्रदेश) को ‘माता महादेवी कौशिक यादगारी लघुकथा पुरस्कार-2025’, डॉ. विजय जिंदल, राजपुरा को ‘सरदार गुरबचन सिंह कोहली यादगारी मिनी कहानी सहयोगी पुरस्कार-2025’ तथा डॉ. वसुधा गाडगिल, इंदौर (मध्य प्रदेश) को ‘श्रीमती ऊषा प्रभाकर यादगारी लघुकथा पुरस्कार-2025’ प्रदान किया गया। अंतरा करवड़े का पुरस्कार डॉ. विष्णु गाडगिल ने प्राप्त किया। इस सत्र का संचालन बीर इंदर बनभौरी ने किया।समारोह का तीसरा सत्र भी मिन्नी कहानी पाठ एवं चर्चा पर आधारित था। इसके अध्यक्ष मंडल में डॉ. वसुधा गाडगिल, राजिंदर माज़ी, मुख्य संपादक ‘जन दस्तक’, तथा सुरिंदर कैले शामिल हुए। डॉ. गुरप्रीत संगराणा, प्रोफेसर, महाराजा रणजीत सिंह टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा विशेष टिप्पणीकार के रूप में उपस्थित रहे।इस सत्र में मुज़फ़्फ़र इकबाल सिद्दीकी, जोगिंदर कौर अग्निहोत्री, तरुणवीर सिंह, बलविंदर कौर खुराना, परगट सिंह जंबर, बलराज कुहाड़ा, डॉ. शील कौशिक, अवतार कमाल, शबनम सुल्ताना, गुरजीत कौर अजनाला, मेजर शक्ति राज कौशिक, संदीप सोखल बादशाहपुरी तथा राजिंदर रानी ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।इन रचनाओं पर चर्चा करते हुए डॉ. संगराणा ने कहा कि मिन्नी कहानी विधा लोक भावनाओं की अभिव्यक्ति करती है। उन्होंने प्रस्तुत रचनाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए लेखकों के साथ कुछ महत्वपूर्ण बिंदु भी साझा किए। इस सत्र का संचालन डॉ. भवानी शंकर गर्ग ने किया।समारोह का चौथा सत्र मिन्नी कहानियों पर आधारित नाटक की प्रस्तुति से संबंधित था। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. इंदरजीत कौर, मुख्य सेवक, भगत पूर्ण सिंह पिंगलवाड़ा, अमृतसर, कांता राय, निदेशक, लघुकथा शोध केंद्र, भोपाल, डॉ. हरप्रीत सिंह राणा, आलोचक तथा योगेश सूरी, पिंगलवाड़ा, अमृतसर ने की।गुरमेल शामनगर के निर्देशन में लोक कला मंच, मजीठा की टीम द्वारा पिंगलवाड़ा को आधार बनाकर लिखी गई मिन्नी कहानियों पर आधारित नाटक ‘मानस की जात’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई।बीबी इंदरजीत कौर ने लेखकों को सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध लिखने तथा पर्यावरण की रक्षा और संभाल के लिए साहित्य सृजन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा विरसा और संस्कृति बहुत महान है तथा हमें इस पर गर्व करना चाहिए।इस सत्र के दौरान डॉ. प्रदीप कौड़ा को ‘श्री गोपाल विंदर मित्तल यादगारी मिनी कहानी शोध पुरस्कार-2025’ तथा डॉ. अशोक भाटिया को ‘रवि प्रभाकर यादगारी लघुकथा पुरस्कार-2025’ प्रदान किया गया।योगराज प्रभाकर द्वारा अनुवादित दो पुस्तकों ‘डॉ. पुरुषोत्तम दुबे की चयनित मिन्नी कहानियाँ’ और ‘बिक्रमजीत नूर की चुनिंदा लघुकथाएँ’ के अलावा डॉ. भाटिया की संपादित पुस्तक ‘हिंदी लघुकथा: आठवाँ दशक’ का भी लोकार्पण किया गया। इस सत्र का संचालन गुरसेवक सिंह रोड़की ने किया।समारोह के दूसरे दिन आयोजित विदाई सत्र में डॉ. कुलदीप सिंह दीप, महासचिव, प्रगतिशील लेखक संघ, पंजाब मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने ‘आज के दौर में लेखक की भूमिका’ विषय पर अत्यंत महत्वपूर्ण चर्चा की।डॉ. दीप ने भारतीय एवं विश्व के चिंतकों के संदर्भ देते हुए लेखकों को ‘मंडी का हिस्सा’ बनने से बचने की प्रेरणा दी तथा लोगों के लिए लिखने और सामाजिक संघर्षों में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो कला लोगों के लिए होती है, वही स्वीकार्यता प्राप्त करती है। उन्होंने दुनिया में फैलते कॉरपोरेट जगत के प्रभाव और हमलों का मुकाबला करने का भी आह्वान किया।इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. शील कौशिक, हरियाणा तथा डॉ. बलजीत कौर रियाड़, सहायक प्रोफेसर, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर ने की। डॉ. रियाड़ ने कहा कि आज के दौर में लेखक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसलिए लेखकों को अपनी लेखनी के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।इस सत्र में डॉ. गुरप्रीत सिंह संगराणा को ‘श्री अमरजीत सिंह सरींह ए.एस.आई. यादगारी मिनी कहानी आलोचक पुरस्कार-2025’, मंगत कुलजिंद को ‘गुलशन राय यादगारी मिन्नी कहानी पुस्तक पुरस्कार-2025’ तथा गुरप्रीत कौर (प्रीत इंद) को ‘श्री राजिंदर कुमार नीटा यादगारी मिन्नी कहानी युवा लेखक पुरस्कार-2025’ प्रदान किया गया।इसके अलावा ‘घुंघरू कथा’ मिन्नी कहानी संग्रह (संपादक: जगदीश राय कुलरियाँ, कुलविंदर कौशल), ‘पढ़दियां-वाचदियां’ (बिक्रमजीत नूर) तथा ‘मिन्नी कहानी में युगीन संदर्भ’ (सरीती रघुनंदन) पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।मिन्नी कहानियों के पाठ के दौरान बिक्रमजीत नूर, डॉ. हरजिंदरपाल कौर कंग, कुलविंदर कौशल, अरुण धर्मावत, अशोक दर्द, डॉ. वसुधा गाडगिल, डॉ. ममता माली, कांता राय, राधेश्याम भारतीय, रीता सिंह असम, सुखवीर सिंह खोजार्थी, सोमा कलसिया तथा वंदना जोशी ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया।

इस अवसर पर 36वें मिन्नी कहानी प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।दो दिनों तक चले इस साहित्यिक समारोह में अन्य साहित्यकारों के अलावा डॉ. बिक्रमजीत घुम्मण, डॉ. सुहिंदरबीर, कुलविंदर कौशल, संत सिंह संधू, आशा दर्द, सुमित्रा माज़ी, डॉ. प्रशोत्तम लाल, हरिंदर पाल सिंह, योगराज प्रभाकर, कश्मीर सिंह आदि भी उपस्थित रहे।समारोह के दौरान लेखकों ने पिंगलवाड़ा के विभिन्न वार्डों का दौरा कर वहाँ की कार्यप्रणाली को भी समझा।—

जगदीश राय कुलरियाँ, सीमा वर्मा

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