सातवाँ पुरस्कार
बहुत दिनों से उछल रहा था। कह रहा था कि मेरी पहुंच ऊपर तक है!’ टेबल पर हाथ मारते हुए वे जोश में बोले।
‘ रेस्टोरेंट तो काफी महंगा लग रहा!’ पत्नी बोली।
‘ शहर के सबसे पॉश इलाके में है महंगा तो होगा ही! पर टेंशन की क्या बात आज जेब गर्म है!’ उन्होंने जेब से नोट की गड्डी निकाली और दिखाने लगे। अचानक हाथ से गड्डी फिसली और फर्श पर गिर गई। उन्होंने गजब की तेजी दिखाते हुए उसे उठाकर जेब में रख लिया।
‘ हद करते हो!’ यह कहते हुए पत्नी ने अपनी आँखें बड़ी कर दीं। ‘ झाड़ तो लेते!’ पत्नी टेबल पर झुकते हुए धीरे से बोली।
‘ आज बहुत दिनों बाद बाहर खाने आए हैं! कितने दिनों बाद सूखा दूर हुआ!’ वे अपनी झोंक में बोले।
पत्नी ने मैन्यू कार्ड उठा लिया।
वे आगे बोले,’मैंने भी ठान लिया कि ठीक है बच्चू तू लगा ले ऊपर तक जैक, मैं भी देखता हूं तेरा काम कैसे होता है! ठीक है मुझे न खिला! तेरी फाइल को अब दीमक ही खाएगी!’
पत्नी मैन्यू कार्ड पर आँखें गड़ाए सब सुनती रही । तभी उनके पास वेटर आकर खड़ा हो गया। पत्नी वेटर को खाने का ऑर्डर देने लगी।
‘ स्टार्टर में सूप नहीं हनी चिली पोटेटो ले आइए!’
बीच में बच्चा जोर से बोला,’ मां वनीला आइसक्रीम!’
‘पहले आप आइस्क्रीम दे जाएं!’ पत्नी बोली।
‘ मम्मी वनीला!’ बच्चा फिर जोर से बोला।
‘ ठीक है वनीला आइस्क्रीम!! वह वेटर को देखते हुए बोली।
‘ छह महीने में ही सारी अकड़ निकल गई उसकी। सॉरी- सॉरी बोलते जबान न थक रही थी! आज जब दे रहा था,तब मैंने कहा कि क्यों तुम्हारी पहुंच तो ऊपर तक की ही! आई मस्ट टेल यू उसका चेहरा देखने वाला था!!! ‘ वे गर्व से बोले।
पत्नी मुस्कुराती हुई उनको देख रही थी ।
वेटर जल्द ही आइस्क्रीम लेकर लौटा। अभी आइस्क्रीम रखा ही था कि बच्चा आइस्क्रीम पर टूट पड़ा। खाते वक्त आइस्क्रीम टेबल पर गिर गई। बच्चा टेबल से उठाकर खाने को हुआ, तो वे गुस्से से फट पड़े,’ कितनी बार समझाऊं तुम्हें कि गिरा हुआ नहीं खाते! बेड मेनर्स!!!’
-0-अनूप मणि त्रिपाठी, ई – 5003,सेक्टर – 12। राजाजीपुरम,लखनऊ-226017, उत्तर प्रदेश
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