अक्तुबर 2026

देशतीसरा दरवाज़ा     Posted: October 1, 2026

  तीसरा पुरस्कार

रेलवे स्टेशन के पास मिश्रा जी का पुराना मकान था, जिसमें मिश्रा जी और उनकी पत्नी सुरभि बस यही दो जने रहते थे। दोनों अब उम्र की अंतिम सीढ़ियों पर थे। सुरभि अक्सर बीमार रहतीं थीं और मिश्रा जी उनकी सेवा में लगे रहते। इनके घर में तीन दरवाजे थे, पर तीसरा दरवाज़ा कभी खुलता नहीं था। पड़ोस में बच्चों ने उसे ‘भूत वाला कमरा’ तक कहना शुरू कर दिया था।

                   इन दोनों का एक बेटा था, जो विदेश में रहता था। हर महीने मिश्रा जी को सुनहरे बॉर्डर वाला एक सुंदर पोस्टकार्ड मिलता था। दोनों इस दिन का बहुत बेसब्री से इंतज़ार करते थे। जब भी मिश्रा जी वह पोस्टकार्ड सुरभि के हाथ में देते, सुरभि खिल- सी जातीं। सुरभि उसे धीरे से पढ़तीं , “बाबा, मैं इस महीने भी नहीं आ सका… अगली बार ज़रूर आऊँगा। माँ कैसी हैं? मैं रोज़ आपकी तस्वीर को देखता हूँ। आपका बेटा — सोनू”

पोस्टकार्ड पढ़ने के बाद सुरभि चुप हो जातीं। कभी आँखों में नमी, कभी मुस्कान और कभी सिर्फ़ लंबी साँस।

     अपने बेटे का इंतज़ार करती सुरभि एक दिन बीमारी से हार गईं और इस दुनिया से चली गईं। शहर की भीड़भाड़ में सिर्फ दो लोग थे, जो सुरभि जी की अंतिम यात्रा में  शामिल थे , मिश्रा जी और पुराना रिक्शेवाला रामू। दाह- संस्कार करने के बाद जब मिश्रा जी घर लौटे, तो बिना किसी से बात किए चुपचाप घर के अंदर चले गए । पड़ोसियों ने  खिड़की से झाँककर  देखा, उस शाम पहली बार तीसरा दरवाज़ा खुला।

           कमरे के भीतर हल्का अँधेरा था। दूसरे कमरों के विपरीत, यह कमरा बहुत सलीके से सजा हुआ था। दीवारों पर सुंदर-सुंदर सैकड़ों पोस्टकार्ड्स  लगे हुए थे। हर कार्ड पर सुंदर भावनाएँ, पर अजीब-सी एकरूपता थी ।

 सभी पर छोटेअक्षरों में एक पंक्ति  थी:

जेनरेटेड बाय सोनू 

ए आई इमोशन 

कम्पैनियन/वर्सन ३.४ ( Companion | Ver. 3.4)

कमरे के एक कोने में एक पुराना टैबलेट रखा था। स्क्रीन अब भी ऑन था। मिश्रा जी ने टैबलेट उठाया, कुर्सी पर बैठे,और धीरे से बोले — “सोनू, माँ अब नहीं रही। अब ये कार्ड बंद कर दो…”

कुछ देर टैबलेट चुप रहा, फिर स्क्रीन पर एक उत्तर उभरा:  “I’m sorry to hear that. Would you like to send a sympathy message to yourself?”

               मिश्रा जी की आँखें भर आईं। उन्होंने स्क्रीन को बंद किया और दरवाज़ा भी। वह तीसरा दरवाज़ा… फिर कभी नहीं खुला।

रचना श्रीवास्तव, ८४१ वेस्ट डुआर्टे रोड,यूनिट 3 , आर्केडिया 91007, कैलिफोर्निया ,अमेरिका

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