सितम्बर 2026

देशान्तरउल्लू     Posted: September 1, 2026

एक बार एक उल्लू आधी रात के समय, जबकि आकाश में कोई साथ नहीं था, एक वक्ष की टहनी पर बैठा था। नीचे धरती पर ये छछून्दर उसकी नजर बचाते हुए, जाने लगे, तो उल्लू ने कहा, “कहाँ जा रहे हो?’’

छछूंदरों को हैरानी हुई कि ऐसे गहन अँधेरे में भी कोई उन्हें देख सकता है। वे जवाब देकर आगे निकल गए और रास्ते में जाने कितने ही जानवर मिले, उन सबको उल्लू के बारे में बताया और जबकि वह सभी जानवरों से बड़ा और अक्लमंद जानवर है, क्योंकि वह अँधेरे में देख सकता है और किसी भी जानवर को जवाब दे सकता है।

“मैं अपनी आँखों से देख लूँ तभी मानूँगा,’’ पक्षियों के मुखिया ने कहा…फिर एक रात, जबकि बहुत गहरा अँधेरा था, वह उल्लू से मिलने गया। उसके पास जाकर पूछा, ‘‘मेरे कितने पंजे हैं ?’’

“दो,’’ उल्लू ने जवाब में कहा।

पक्षी ने इस किस्म के कुछ और सवाल और पूछे, उल्लू ने उनके बिल्कुल ठीक जवाब दिए।

पक्षी हैरान होकर लौटा ओर उसने जंगल के सभी जानवरों को उल्लू के बारे में बताया कि वह संसार में सबसे बड़ा और अकलमंद जानवर है।

“क्या वह दिन के समय भी देख सकता है?’’ लोमड़ी ने पूछा।

“हाँ , क्या वह दिन के समय भी देख सकता है?” और दो से-तीन जानवरों ने लोमड़ी का सवाल दोहराया।

इस पर बाकी सभी जानवर जोर से हँस पड़े और लोमड़ी और उन दो-तीन जानवरों का मज़ाक उड़ाने लगे। आखिर उन्हें इतना तंग किया कि लोमड़ी और उसके साथियों को वह इलाका छोड़कर भाग जाना पड़ा।

तब बाकी सभी जानवरों ने संदेशा भेजकर उल्लू को अपना सरदार बनने के लिए बुलाया।

जब उल्लू वहाँ आया, तो दोपहर का समय था और सूरज चमक रहा था। उल्लू धीरे-धीरे बड़ी शान से चलता हुआ आया और उसने आँखें फैलाकर हर किसी को देखा। सब पर उसका बहुत रौब पड़ा।

“यह तो साक्षात्‌ ईश्वर लगता है।” एक मुर्गी ने कहा।

“हाँ , बिल्कुल ईश्वर!’’  बाकी के जानवर भी सहमत हुए।

उसके बाद उल्लू जहाँ कहीं भी जाता, सभी जानवर उसके पीछे-पीछेजाते । वह किसी चीज से टकराया, तो वे भी टकराते, आखिर वह एक बड़ी सड़क पर गया और उसके बीच में खड़ा होकर आस-पास देखने लगा। बाकी जानवरों ने भी वैसा ही किया। तभी एक चील ने देखा कि सड़क पर एक ट्रक चला आ रहा है । उसने ट्रक के बारे में पक्षियों के मुखिया को बताया।

पक्षियों के मुखिया ने उल्लू को बताया; लेकिन उल्लू ने लापरवाही दिखाई।

“क्या आपको डर नहीं लगता?’’ पक्षियों के मुखिया ने पूछा।

“डर कैसा?’’ उल्लू ने बड़े सहज भाव से कहा; क्‍योंकि वह ट्रक को देख ही नहीं सकता था।

“यह तो ईश्वर है!” बाकी जानवरों ने सोचा। फिर वे उल्लू के गिर्द जमा होकर उसका गुणगान करने लगे। तभी ट्रक बड़ी तेज़ रफ्तार से उन पर से गुज़र गया। कुछ एक जानवरों को छोड़कर शेष सब मारे गए । जिनमें उल्लू भी शामिल था।

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