अगस्त 2026

देशरक्षक     Posted: April 1, 2026

वीरान- सी जगह से गुजरते हुए, एक झाड़ी के पास से किसी के कराहने की आवाज सुनाई दी। कार की खिड़की से बाहर देखा तो डर गया। लगभग तेरह–चौदह वर्ष की कोमल सी लड़की बिखरी सी अवस्था में पड़ी थी। उसके माथे के एक कोने से खून बह रहा था।

‘‘लगता है कोई एक्सीडेंट करके इसे फेंक गया है। उठा ले चलूँ….।…..पर मुझे क्या जरूरत है मुफ्त की मुसीबत मोल लेने की।’’ सोचते हुए मैंने गाड़ी आगे बढ़ा ली।

थोड़ी ही दूर गया होऊँगा कि मन ने मुझे लानत दी, अगर कहीं इसकी जगह मेरी अपनी बच्ची होती….।’’ एक सिहरन सी मेरे भीतर दौड़ गई और मैंने गाड़ी पीछे मोड़ ली।

लड़की को लेकर अस्पताल पहुँचा, तो डाक्टर मेरे प्रभाव के कारण केस लेने से इंकार न कर सका।

‘‘ कपूर साहब! हमें पुलिस को सूचित कर देना चाहिए। इस लड़की से बलात्कार हुआ है।’’ कुछ समय पश्चात डाक्टर ने रिपोर्ट देते हुए कहा था।

‘‘ओ…ह्…हो….!’’ काँपता- सा दो–अक्षर का शब्द मेरे मुँह से निकला।

अगले ही पल मेरी नजर उस लड़की पर पड़ी। वह बड़ी मासूम निगाह से कभी मेरी तरफ और कभी आसपास फिर रहे डाक्टर व नर्सो की तरफ देखते हुए स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रही थी। ‘‘कौन कर गया इस छोटी सी जान से इतनी बड़ी बद–इखलाकी?’’ लड़की की ओर देख–देखकर मैं निरंतर झकझोरा जा रहा था।

‘‘बेटी! तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ, तुम इन्हें सब सच–सच बता दो। ये तुम्हें सुरक्षित तुम्हारे घर छोड़ आएँगे।’’ थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने अपने साथ खड़े तीन–चार व्यक्तियों की ओर इशारा करते हुए कहा। जैसे ही लड़की की निगाह उन वर्दीधारी लोगों पर पड़ी, वह जोर से चीखमार कर फिर बेहोश हो गई।

अनुवाद:श्यामसुंदर अग्रवाल

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