जून 2026

देशअंतिम विश्राम     Posted: October 1, 2025

“अम्मा…जल्दी चलो…अभी डॉक्टर के यहाँ पहुँचने में भी आधा घंटा लगेगा।”

   वॉकर का सहारा लेकर अम्मा सीढ़ी तक आकर बोलीं -“बेटा…अपनी मोटरसाइकिल थोड़ा सीढ़ी के पास लगा ले, बैठने में आसानी रहेगी।”

“ठीक है अम्मा…लो बैठो।”

“लगता है घुटनों का दर्द मेरे साथ ही जाएगा।”- बाइक में बैठते हुए अम्मा कराह उठीं।

“बेटा…और कितनी देर लगेगी, डॉक्टर के यहाँ पहुँचने में?”

“बस दस मिनट। बैठने में परेशानी हो रही हो, तो थोड़ी देर रुक जाता हूँ।”

“हाँ बेटा…कहीं बैठने की जगह दिखे तो रुक जाना, थोड़ी कमर सीधी कर लूँगी।”

“आगे बड़ा सा चबूतरा दिख रहा है, वहीं पर गाड़ी रोकता हूँ।”

“अब चलें अम्मा…अब तो डॉक्टर साहब भी आ गए होंगे।”

“बैठने से बहुत आराम मिला…चलो बेटा “

थोड़ी दूर जाने के बाद जोर से खिलखिलाते हुए बेटे ने पूछा -“अम्मा!…चबूतरे में क्या लिखा था मालूम?

“क्या?”

“लिखा था…अंतिम विश्राम” यह सुनकर अम्मा भी जोर से हँस पड़ीं।

माँ – बेटे की तेज़ खिलखिलाहट में डॉक्टर का दवाखाना कब आ गया पता ही नहीं चला।

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