छत पर बैठे एक कौवा पर छिपकर पत्थर से निशाना साधते देख मैंने उसे टोका, ‘‘भई! क्यों मारना चाहते हैं उसे? क्या बिगाड़ा है उसने आपका?’’
‘‘साहब ! अभी–अभी एक कौवा मेरे बच्चे के हाथ से रोटी का टुकड़ा छीनकर भाग गया है’’ -उसने रोष भरे स्वर में कहा।
‘‘आप उसे पहचानते हैं?’’ मैने पुन: पूछा ‘‘क्या वही छीनकर भागा था रोटी?’’
‘‘वह न हो, दूसरा ही हो, है तो कौवा ही।’’ उसने दो टूक जबाव दिया।
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