जून 2026

देशतीसरा बेटा     Posted: June 1, 2025

घबराई हुई वृद्धा, हृद‌याघात से कराहते, पसीने-पसीने होते पति को रिक्शे में डाल निजी चिकित्सालय में लाई। स्ट्रेचर लाए जाने में होते विल‌म्ब को देख दुःख की उस घड़ी में भी वह झल्ला पड़ी। जब रोगी को चिकित्सा कक्ष में लाया गया, तो आरंभिक जाँच के पश्चात् युवा डॉक्टर ने पूछा- ”माँजी, क्या आपने नर्सिंग होम की सारी औपचारिकताएँ पूरी कर दीं ?”

वृद्धा ने निरीह आँखों से डॉक्टर को देखा। उन आँखों में बहुत कुछ था- भय, दुश्चिंता और अनिश्चित भविष्य की आशंका ।

“मेरा मतलब है, एडवांस वगैरह जमा कर दिया आपने?”डॉक्टर ने स्पष्ट किया। 

“जैसे ही इन्हें अटैक आया, उठाकर यहाँ चली आई। विश्वास कीजिए, कल बैंक खुलते ही सारी औपचारिकताएँ पूरी कर दूँगी।” निजी अस्पतालों के पिछले कटु अनुभवों की मारी वृद्धा ने अत्यंत दयनीय स्वर में कहा।

“क्या आप अकेली हैं?” मरीज की गंभीर दशा देख डॉक्टर ने पूछा।

“दो बेटे हैं; लेकिन बहुत दूर हैं। खबर करूँगी,  तब भी आने में चौबीस घंटे लग जाएँगे।…  पता नहीं, तब तक क्या हो?” बदहवास वृद्धा की आँखें छलछ‌ला आईं।

“घबराइए मत माँजी। मैं यहाँ हूँ न, आपका तीसरा बेटा।” डॉक्टर ने वृद्धा के कंधे पर हाथ रखकर कहा, तो  बुढ़िया की अश्रुधारा तेज हो गई। रोगी को तो जैसे संजीवनी ही मिल गई।

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