जून 2026

देशान्तरपिल्ला     Posted: April 1, 2025

सोल्जेनित्सिन

पिल्ला

हमारे पिछवाड़े वाले अहाते में एक लड़का अपने छोटे कुत्ते शारिक को जंजीर से बाँधे रखता था। किसी हथकड़ी की तरह यह जंजीर उसकी रोएँदार गर्दन के चारों ओर तब से जकड़ी रहती थी, जब वह पिल्ला था।

एक दिन मैंने मुर्गे की कुछ हड्डियाँ लीं, जो उस वक्त भी कुछ गरम थीं और जिनसे स्वादिष्ट गंध फूट रही थी। एकदम तभी लड़के ने उस बेचारे कुत्ते को खोला था< ताकि वह अहाते का चक्कर लगा सके। वहाँ घनी और पर्तदार बर्फ़ थी, जिस पर शारिक हिरन की तरह उछल–कूद मचा रहा था। पहले पिछली टाँगों पर और फिर अगली टाँगों पर; अहाते के एक कोने तक; आगे और पीछे…अपनी थूथनी बर्फ़ में गड़ाता हुआ।

वह मेरी तरफ भागा। वह बिल्कुल झबरा था। मेरी तरफ उछला। हड्डियों को सूँघा और फिर वापस चला गया, बर्फ़ की ही गोद में।

मुझे तुम्हारी हड्डियों की जरूरत नहीं है, उसने कहा। मुझे केवल मेरी आजादी दे दो….।

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