“सो जा मुन्ना! सो जा मेरे प्यारे मुन्ना! मेरे राज दुलारे सो जा!”
“कट! कट!”
सीन कट गया, पर प्रीति मुन्ने को अपनी छाती से वैसे ही चिपकाए रही।
“मैडम! इसकी माँ…”
उसका चेहरा खिंच गया और कई लकीरें चेहरे पर उभर आईं। आस-पास कितनी चकाचौंध है,चमक है पर फिर भी सब कुछ फीका-फीका है…खाली… खाली ।”
“मैडम! बेबी….”
उसने एक निगाह बेबी की माँ पर डाली, फटी-पुरानी साड़ी में लिपटी यह है मुन्ने की माँ! हाँ सच तो यही है।
“मैडम बेबी रो रहा है। शायद भूखा है।”
माँ ने अपने बेटे को अपनी गोद में ले लिया।अपने हाथ गोल घुमाता,माँ के आँचल में ढका मुन्ना भी चुप हो गया।माँ का चेहरा ममता की आभा से दिपदिपा रहा था।
“मैडम सेट तैयार है।”
“मेकअप मैन!”
उसने आईने में झाँका और अपने मेकअप- पुते चेहरे पर ममता की चमक तलाशने लगी।