जून 2026

पुस्तकसमकालीन हिन्दी लघुकथा और आज का यथार्थ     Posted: September 1, 2019

विषय और शिल्प दोनों दृष्टियों से हिन्दी लघुकथा धीरे-धीरे फैलाव ले रही है। उसके आयामों की बात करें तो रचना और समीक्षा दोनों धरातलों पर साहित्य सामने आ रहा है। अलग-अलग विषयों पर संकलन और समीक्षात्मक टिप्पणियाँ-दोनों रूपों में लघुकथा पर काम हुआ है और जारी है। लघुकथा पर आलोचनात्मक कार्य बहुत कम हुआ है, जिसके कई कारण हैं। इस दृष्टि से वरिष्ठ कथाकार माधव नागदा की लघुकथा आलोचना और समीक्षा की पुस्तक ‘समकालीन हिन्दी लघुकथा और आज का यथार्थ’ का आना स्वयं में महत्त्वपूर्ण और सुखद सूचना है। एक गंभीर कलमकार होने के कारण माधव नागदा की इस पुस्तक का महत्त्व और भी बढ़ जाता है।
लघुकथा-साहित्य कैसा लिखा जा रहा है-इसे बताना आलोचक काम कार्य है। इसी दायित्व को कथाकार माधव नागदा अपने आलोचना-कर्म से ईमानदारी और गंभीरता के साथ निभा रहे हैं। इस पुस्तक में इनके समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित आलेख, समीक्षात्मक टिप्पणियाँ और साक्षात्कार शामिल किए गए हैं। ये आलेख माधव नागदा के गहन और व्यापक अध्ययन को सत्यापित करते हैं। लघुकथा में विषय-विविधता हो या भूमंडलीकरण की चुनौतियाँ हों, यथास्थिति का अतिक्रमण हो या प्रेम के आयाम हों, शिल्प हो या कि भाषा हो-सभी पर लेखक ने जमकर लिखा है। विषय संबंधी विमर्श के लिए विभिन्न आलोचकों के विचार भी दिए गए हैं। अपने मत की पुष्टि के लिए नए-पुराने लेखकों की लघुकथाओं के उदाहरण देने में उदारता से काम लिया गया है जो पुस्तक को समृद्ध और रोचक बनाता है। कविता के अंश इन्हें और संपन्न बनाने में सहयोगी हुए हैं।
इन आलेखों और समीक्षाओं में लेेेेेेेेेेेेेेेेेेखक ने लघुकथा-साहित्य पर केन्द्रित होकर कलम चलाई है जिस कारण इस पुस्तक का महत्त्व और भी बढ़ गया है। नए लघुकथा लेखकों के लिए भी यह पुस्तक लाभप्रद हैं पुस्तक के अंतिम भाग में माधव नागदा से लिए गए साक्षात्कार इनकी स्पष्ट अवधारणाओं और बेलाग बात कहने की कला के कारण नए लेखकों के लिए विशेष उपयोगी हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस आलोचना पुस्तक का लघुकथा-जगत में सर्वत्र स्वागत होगा।
समकालीन हिन्दी लघुकथा और आज का यथार्थ: माधव नागदा, प्रकाशक: सूर्य प्रकाशन मंदिर दाऊजी रोड,बीकानेर। संस्करण: 2019 । मूल्य: 500 रु0। पृष्ठ: 192। प्ैठछ रू 978.93.87252.25.7

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