नगर-निगम का स्कूल रोज की तरह चल रहा था। एक दिन एक इंस्पेक्टर ने आकर कक्षाओं का मुआयना किया।
चौथी कक्षा में जाकर उसने पूछा, “सर्दियों में कौन-से कपड़े पहनने चाहिए?”
इस पर कुछ हाथ खड़े हुए, कुछ बुझी आँखें चमकीं। इन्सपेक्टर ने एक खड़े हाथ को इशारा किया।
“गर्म कपड़े, जी!”
जवाब सुनकर बाकी हाथ नीचे हो गए।
“मैं बताऊँ जी…?” एक हाथ अब भी उठा हुआ था।
“हाँ, बताओ!”
“जी, सर्दियों में फटे हुए कपड़े पहनते हैं…”
“ऐसा तुम्हें किसने बताया?”
“बताया नहीं जी, मेरी माँ ऐसा करती है। यह देखिए…” उसने गिनाना शुरू किया, “ये एक, ये दो, ये तीन फटी कमीजें और इन सबके ऊपर ये सूटर… माँ कहती है कि सर्दियों में फटे हुए कपड़े सूटर के नीचे छिप जाते हैं।”
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लघुकथा.com
जून 2026
देशव्यथा-कथा Posted: June 1, 2025
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