जून 2026

देशान्तरविषय ज्ञान     Posted: September 1, 2020

महाशय ‘ब’ स्टेज कारीगरों,मिस्त्रियों और ड्राइवरों के साथ हँस–बोल कर बातचीत करते थे। इन लोगों के साथ बातचीत के दौरान उन्हें अक्सर उन्हें अक्सर ऐसे सवालों का जवाब देना पड़ता था, जिनसे कि अन्यथा उनका सामना नहीं हो सकता था। एक कारीगर का सवाल था, ‘‘मौत कैसे आती होगी?’’
‘‘आप जानते हैं,’’ महाशय ‘ब’ बोले, ‘‘जीवन के साथ कुछ ऐसा है, हृदय के कपाट खुलते हैं और बन्द होते हैं, फिर खुलते हैं और बन्द होते हैं और एक दिन हठात् फिर ये कपाट नहीं खुलते।’’
-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine