सितम्बर 2026

संचयनविशमास्टर : ए कोरोना वॉरियर     Posted: February 1, 2021

सांत्वना पुरस्कार-1

वह अपने घर के बरामदे में रखी कुर्सी पर बैठकर मोबाइल में कोविड-19 के ताज़ा स्टेट्स देखने में मशगूल था कि मेन गेट पर एक बाइक आकर रुकी । ई-कार्ट का विशमास्टर को बाइक से उतरते देख उसने फटाफट अपने हाथों को बरामदे में ही रखे सेनिटाइज़र से सेनिटाइज़ किया, मास्क लगाया और गेट के पास ज़रूरत से ज़्यादा दूरी बनाकर खड़ा हो गया ।

कोरोना काल में ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियाँ कुछ दिनों तक बंद रहने के बाद  पिछले पखवाड़े से खुल गई थीं । अब वह ज़रूरत के बहुत सारे उपयोगी सामान ऑर्डर प्लेस कर मँगवा लेता है । इन सामानों की ख़रीदारी के लिए घर से बाहर निकलने की ज़रूरत नहीं रही । बिग बास्केट , जमोटा , अमेज़न ,फ्लिपकर्ट के खुल जाने से वह बेहद प्रसन्न था; क्योंकि इस सुविधा से  ‘स्टे होम, स्टे सेफ़’ का एक हद तक पालन हो जा रहा था ।

विशमास्टर एक हाथ में पैकेट लिये दूसरे हाथ से गेट खोलने जा ही रहा था कि वह जोर से चिल्लया , “अरे , फिर तुमने गेट को छू लिया ……….हाथ मत लगाओ !” उसकी आवाज़ की कर्कशता ने  विशमास्टर पर डंडे जैसा प्रहार किया । वह सहम गया ।

“सॉरी सर …….एक्सट्रीमली सॉरी !”

“हर बार यही कहते हो और हाथ लगा देते हो !” उसके स्वर के रूखेपन के एहसास से विशमास्टर एक पल के लिए थम गया ।

“ आगे ख्याल रखूँगा ।………पैकेट ले लीजिए सर !”

“अरे भाई , बाउंड्री पर रख दो न !”अपनी जगह से हिले बगैर उसने उसी  लहज़े में कहा ।

“जी सर !” ………..फीडबैक दे दीजिएगा प्लीज !”

“हाँ , हाँ दे दूँगा !”

विशमास्टर पैकेटों से भरे बड़ा और वजनी बैग को कंधे से लटका कर जैसे ही बाइक स्टार्ट करने को उद्यत हुआ, उसने यूँ  ही पूछ डाला , “तुम लोगों को डर नहीं लगता ?”

“डर ?” विशमास्टर ने हेलमेट के पारदर्शी काँच से अपनी आँखों को फैलाकर उसके चेहरे पर टिकाया , “लगता है सर  ।……लेकिन……”

“लेकिन क्या ?’

“उसके आगे झुकते नहीं !….झुक जाएँगे तो आप सब की सेवा कैसे कर पाएँगे !”

ज़वाब सुनकर वह झेंप-सा गया । मन ही मन बुदबुदाया ‘नाहक ही ऐसा बेतुका सवाल पूछ डाला’।

“इफ यू डोंट माइंड …….एक बात कहूँ सर ?” विशमास्टर ने हेलमेट उतारकर अपने हाथों  में ले लिया। अपने बुझे और मायूस चेहरे पर ‘सर्विस विद स्माइल’ के तहत  मुस्कान लाने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा , “सेफ्टी और सोशल डिस्टेंसिंग  मेन्टेन करना तो ज़रूरी है सर ।…….लेकिन इतना भी नहीं कि उससे  इंसानियत का खात्मा हो जाए !”                                                        वह  झटके से बाइक स्टार्ट कर पलक झपकते आंखों से ओझल हो गया  और दे गया शालीन पलटवार से  शर्मिंदगी का वायरस जिसके चपेट में आकर वह यथावत् खड़ा रह गया ।

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