-वाउ! आज किस पर बिजलियाँ गिराने का इरादा है? मानव ने आईने में झाँकते हुए कहा।
-तुमसे बढ़कर कौन है हुजूर? ये और कहाँ गिरेगी। आखिरकार हमारा सात जन्मों का रिश्ता जो है। इठलाकर मोनिका ने मानव की आँखों में झाँकते हुए कहा और मन में सोचा आज पार्टी में राज, उस पर से नजरे नहीं हटा पाएगा।
प्रिये! दुनिया हमें यूँ ही मेड फॉर इच् अदर नहीं कहती। मानव ने नज़रें फेरते हुए कहा। उसे लगा आईना उस पर हँस रहा है।
घर, गाड़ी, शानदार रहन-सहन। पर कहीं कुछ कमी है। मोनिका को लगता भौतिक सम्पन्नता तो मिली; पर मानव में वह बात नहीं जो राज में है। वह उसके सपनों का राजकुमार नहीं।
उधर मानव को लगता मोनिका में वह बात नहीं। जो वह चाहता था। कुछ लजीलापन, कुछ भारतीयता। हर बात पर नारी स्वतन्त्रा की बात करती है। इसकी महत्त्वाकांक्षाओं के पीछे रिश्ते बेमानी हैं। काश सोनाली उसकी ज़िन्दगी में आती सुन्दरता और भारतीयता की मूर्ति। वैसे भी वह रमन उसके साथ जँचता नहीं।
आईना जो उनकी मीठी बातों और मन की चाह का एकमात्र साक्षी था। ख़ुद से बोला-भली कही इनके सात जन्मों के अनुबन्ध की। मैं जो हूँ वही हूँ। इंसान की तरह चेहरे पर चेहरा नहीं ओढ़ता।
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