जून 2026

देशरक्षक     Posted: April 1, 2021

आज राखी का दिन था संस्कृति सुबह से गंभीर और शांत मुद्रा में थी जैसे किसी गहरी सोच में गोते लगा रही हो । तभी उसकी ननद सुप्रिया जो  आज मायके आई थी उससे पूछा-“”अरे भाभी आप राखी बाँधने नहीं गई ?”

” नहीं जाना हो सका” संस्कृति ने बुझे मन से जबाब दिया

“अरे सुप्रिया , आज राखी बाँधेगी या फिर भूखा ही मारेगी ”  भाई सचिन ने पूछा

” आई भैया ”

माँ बाबूजी मंत्रमुग्ध नेत्रों से दोनों भाई बहन को राखी बाँधते हुए देखने लगे । सुप्रिया ने अपने राखी बाँधी ओर सचिन ने उसे  नेग दिया  ।

“अरे भाभी यह दूसरी राखी किसकी है ?  ” सुप्रिया ने पूछा

“मेरी है ” संस्कृति ने  धीमे स्वर में कहा ।

“पर आपके भैया तो आए नही ! ” सुप्रिया ने फिर से जानना चाहा ।

संस्कृति मौन रही और राखी का थाल उठाकर बेडरूम की ओर चल दी ।  सभी आश्चर्य  के भाव से उसके पीछे हो लिए संस्कृति ने दरवाजे की कुंडी को तिलक किया और उस पर राखी बाँध दी ।

“संस्कृति पागल हो गई हो क्या ?” सचिन उस पर लगभग चिल्ला पड़ा ।

“नहीं  ”  जब आप कभी नशे में या गुस्से में घर आते हैं और मेरे साथ दुर्व्यवहार करते हैं ।  मुझ पर हाथ उठाने का प्रयत्न भी  करते हैं ,  मैं स्वयं को बचाने के  प्रयास में दरवाजा बंद करके कुंडी लगाती हूँ । तब आप अपनी पूरी शक्ति के साथ इस दरवाजे को तोड़कर मुझ तक पहुँचना चाहते हैं, तब ये छोटी सी कुंडी आपके सारे गुस्से  को सहन कर आप से मेरी रक्षा करती हैं ।  उन कई रातों में इसने मेरी आपसे रक्षा की है । तो है ना सही मायने में मेरी  रक्षक। अब सचिन की नजरें शर्म से झुकी हुई थी ।

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