सुबह से बाल-सुधार गृह के बच्चे बेहद उत्साहित थे। समाज से मिले तिरस्कार के बीच कभी-कभी तो ऐसे अवसर आते हैं, जब उनके लिए भी कोई कुछ सोचता है। कल ही वार्डेन मैडम ने उनको बताया था कि आज दोपहर में नए साल के उपलक्ष्य में विधायक महोदय उन सबके लिए कुछ उपहार लेकर आने वाले हैं।
बच्चों के साथ-साथ बाल-सुधार गृह की वार्डेन सुनयना जी भी अपने अंदर एक उत्साहपूर्ण ऊर्जा को महसूस कर रही थी। ये बच्चे समाज की नजर में भले ही बहिष्कृत जीवन जी रहे हों, पर उनके अंदर भी उन्होंने समय-समय पर वही निश्छलता और मासूमियत महसूस की है, जो उनकी उम्र के बाकी बच्चों के अंदर होती है। बल्कि कोई-कोई बच्चा तो उनको अक्सर अचंभित भी कर देता था। यहाँ आने से पहले वे भी बाकी लोगों की तरह ही इनके लिए अपने मन में कुछ धारणाएँ रखती थी, लेकिन अब चार सालों से इनके बीच रहते-रहते पता नहीं क्यों, हरेक बच्चे से उनका एक अलग ही आत्मिक जुड़ाव हो गया है। विधायक जी की आर्थिक स्थिति का अनुमान करते हुए सुनयना जी को उम्मीद थी कि कल निश्चय ही बच्चों को बहुत अच्छे उपहार मिलने वाले हैं।
तय समय से लगभग दो घंटों की देरी करते हुए अपने दल-बदल के साथ विधायक महोदय वहाँ पधारे। बच्चों के बीच अपने रटे-रटाये कुछ भाषणनुमा वाक्य बोलकर उन्होंने अपने सचिव को इशारा किया।
सचिव के लाये झोले को देखकर बच्चों ने ज़ोरदार तालियों की गर्जना कर दी। पल भर के लिए सुनयना जी को लगा, बच्चों के लिए असली वाला सांता आया है। लेकिन जब विधायक महोदय ने झोले से पैकेट निकालकर अपनी सारी बत्तीसी झलकाते हुए, पैकेट बाँटने शुरू किए तो सुनयना जी और बच्चे, सभी के मन बुझ-से गए। दो रुपये वाले बिस्किट, पाँच रुपये वाले चिप्स और एक-एक लॉलीपॉप वाले उस पैकेट की तो किसी ने उम्मीद नहीं की थी।
दूसरे दिन के सभी स्थानीय अखबारों ने विधायक जी की इस सहृदयता के विषय में विस्तार से ख़बर छापी थी। मोटे-मोटे अक्षरों में हेड्लाइन भी थी- विधायक जी ने बाल-सुधार गृह के बच्चों को नए साल के उपलक्ष्य में ऊनी कंबल, किताबें और मिष्ठान बाँटे।
सुनयना जी अभी इस ख़बर को पचाने की कोशिश कर ही रही थी, कि तभी आठ साल के दीपक ने उनके पास आकर अपना मासूम सवाल उनकी ओर उछाल दिया, “मैडम जी, ये मिष्ठान क्या होता है?”
सुनयना जी को समझ नहीं आया, वे क्या जवाब दें…।
-0-प्रियंका गुप्ता,‘प्रेमांगन’, एम.आई.जी-292, कैलाश विहार, आवास विकास योजना संख्या-एक, कल्याणपुर, कानपुर-208017 (उ.प्र)