जून 2026

देशान्तरपेशबन्दी     Posted: August 1, 2017

 

पहली वारदात नाके के होटल के पास हुई। फौरन ही वहाँ एक सिपाही का पहरा लगा दिया गया।

दूसरी रोज शाम को स्टोर के सामने हुई। सिपाही को पहली जगह से हटाकर दूसरी वारदात के मुकाम पर नियुक्त कर दिया गया।

तीसरा केस रात के बारह बजे लाण्डरी के पास हुआ।

जब इन्सपेक्टर ने सिपाही को इस नई जगह पहरा देने का हुक्म दिया तो तो उसने कुछ देर गौर करने के बाद कहा, ‘‘मुझे वहाँ खड़ा कीजिए, जहाँ नई वारदात होने वाली हो।’’

-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine