” ये देखिए, सोनू का परीक्षा परिणाम… बहुत ही निराशाजनक है। ” शिक्षिका ने सोनू का अर्धवार्षिक परीक्षा परिणाम दिखाते हुए सोनू की माँ से कहा।
” मैडम! क्या आप ‘ट्यूशन’ लेती हैं?” एक उड़ती नज़र ‘रिपार्ट कार्ड’ पर डालकर सोनू की माँ ने शिक्षिका से पूछा।
” ट्यूशन…? मेरे ट्यूशन लेने न लेने का बच्चे के प्रदर्शन से क्या सम्बन्ध ? ” अव्यावहारिक रवैये और अप्रत्याशित प्रश्न से शिक्षिका हैरान थी।
“है क्यों नहीं मैडम, पुराने विद्यालय में सोनू सदा अव्वल आता था: क्योंकि वहीं के मास्टर जी से ट्यूशन लेता था” दर्प मिश्रित शब्दों में सोनू की माँ बोली।
“ओह्ह्ह ! यानी बच्चे की बुनियाद में ही दीमक लगी है।” कहते हुए निराशा और वितृष्णा से शिक्षिका की नज़रें ख़ुद- ब -ख़ुद झुक गईं।
–0-शशि बंसल गोयल, J-61, गोकुलधाम, एयरपोर्ट रोड, भोपाल पिन – 462038