नवम्बर 2026

देशदाग     Posted: November 1, 2026

बरसात के दिन थे। फूँक–फूँककर कदम रख रहा था। भय था कि कहीं कपड़ों पर कीचड़ के दाग न लग जाएँ।

कभी–कभी यह अतिरिक्त सावधानी भी, भाारी पड़ जाती है। पास से निकलते एक स्कूटर चालक ने पायजामे पर कुछ छींटे उड़ा ही दिए। तभी पीछे से आते एक ट्रक ने अपनी ‘स्प्रे कला’ का प्रदर्शन करते हुए नख–शिख शृंगार कर दिया। मन ही मन उसे कोस रहा था कि ट्रक अंकित सुभाषित पर नजर चली गई, ‘‘बुरी नजर वाले तेरा मुँह काला।’’

हँसी आ गई। मुँह तो काला नहीं हुआ था पर कपड़े जरूर कीचड़ से काले हो गए थे।

हँसी और वेदना के इन क्षणों में एक सड़क बोध जागा,भीड़–भाड़ वाली इस आधुनिका रफ्तार ने किसे दागी नहीं बनाया।

तभी कीचड़ सनी एक घवला कार हार्न बजाती हुई जैसे कह गई, ‘‘देखो, मगर प्यार से।’’

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