जून 2026

भाषान्तरडुबकी     Posted: September 1, 2023

तीसगढ़ी में अनुवाद ; दीपाली ठाकुर

ओखर झुर्राये मुख थोकिन चमके लगिस। अपन आगू के बर्थ म बइठे यात्री ल अंगरी देखावत ओखर आँखी म झाँकत कहिस,

“छमा करिहव, मैं ह गलती नई करत हंव त तुँहर नाम राधाकिसन हवय!”

उनखर बात सुनके सियान राधाकिसन अपन सुरता के कपाट ल खोले के उदिम करत कहिथे “अउ तैं मूलचंद?”

अउ दुनो लकलकवत भेंटथें। अभी कुछे देर पहिली पाछू के स्टेशन म दुनो कंपार्टमेंट म चढ़े रहिन। अब रेलगाड़ी दउड़त हे, दुनो मया म बूड़े बतियाये म मगन हें। राधकिसन कहिथे,”कॉलेज छोड़े के बाद पचास बछर म भेंट”

“हव भाई, मैं व्यापार म लग गेंव, जम्मो उमर ओखरे पाछू दउड़त भागत पहा गे, कई घंव आये घलक परन्तु तुँहर संग भेंट नई हो सकिस” मूलचंद कहिस।

“महू कहाँ रहेंव, पढ़ाई छोड़े के बाद एक ठन धार्मिक संस्था के होके रहि गेंव। समाज सेवा अउ धर्म प्रचार ले समय निकाल के बहुत मुसकिल म चारे-छै बार घर जा पाएँ, उहू थोड़े समय बर” राधकिसन घलक कहिस।

रेलगाड़ी चलत हे, उनखर गोठयई तको।

तभे राधकिसन कहिथे, “भाई एक ठन बात पूछंव ,सही – सही बताहू?”

“हव -हव ,काबर नहीं”

“अब ये जीवन संध्या म, का आप अपन विगत ले पूर्णतया संतुष्ट हव?”

मूलचंद के मुख म गंभीरता उतर गे।अंतस म बूड़त कहिस,”अभी -अभी कई दिन ले मोला अइसे लगत हे के भौतिकता के अंधा दौड़ म मोर नाता धर्म से एकदम टूट गे हे। ऐखर छोड़ कोनो असन्तोष नई हे। तुँहर संग त अईसे कोनो समस्या नई होही?”

“एखरे तो दुख हे” ठंडा स्वांस भरत कहिस

“मोला लगथे भौतिक सुख के उपेक्षा कर मोर जिनगी बेकार गंवा देंव।”

रेलगाड़ी चलत हे। लेकिन बातचीत बंद हे।काबर की दुनो सियान अपन अतीत म बूड़त तउरत हवयं।

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