हजूम ने रुख बदला और गंगाराम के बुत पर पिल पड़ा। लाठियाँ बरसाई गईं। ईंटें और पत्थर फेंके गए। एक ने मुँह पर तारकोल मल दिया। दूसरे ने बहुत-से पुराने जूते जमा किए और उसका हार बनाकर बुत के गले में डालने के लिए आगे बढ़ा, मगर पुलिस आ गई और गोलियाँ चलना शुरू हुईं।
जूतों का हार पहनाने वाला जख्मी हो गया। चुनांचे मरहमपट्टी के लिए उसे सर गंगाराम अस्पताल भेज दिया गया।
(मंटो की कहानियाँ: सं0 नरेन्द्र मोहन से साभार)
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जून 2026
देशान्तरजूता Posted: May 2, 2017
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