इलाके के सभी लोगों ने मिलकर, प्रभु की सत्ता का सिंहासन निर्मित करने का प्रस्ताव पास किया।
इमारत के निर्माण के बाद, धार्मिक पुस्तक सबसे ऊपरली मंजिल पर रखने के लिए स्थान तय किया गया।
ऐलान हुआ, “इलाके का कोई भी शख्स, इस से ऊँची किसी भी तरह की कोई क्रिया नहीं करेगा। अगर कोई ऐसा करता देखा-पकड़ा गया तो, सख्त सजा का भागीदार होगा।’
आसपास देवदार के वृक्ष भी थे। उन्होंने जैसे ऐलान को सुना ही ना हो। वह कहां सुनते थे ऐसे ऐलानों का।
उन्होंने तो बस प्रकृति का ऐलान सुनना ही सीखा था।