जून 2026

देशइलाज     Posted: May 1, 2022

एक माँ अपने छह साल के बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास गई।

उसने डॉक्टर से कहा–वैसे तो मेरा बच्चा स्वस्थ–प्रसन्न है। खूब दूध पीता है, डटकर खाना खाता है, छककर मिठाई खाता है, मुट्ठी भर–भरकर नमकीन खाता है, जी भर खेलता है, मेहनत से पढ़ता है, रंग ला दोो तो ढेरों पेटिंग बनाकर रख देता है, सुरीला गाना गाता है, खूब खुश रहता है। लेकिन एक समस्या है। यह कोकाकोला–पेप्सी नहीं पीता, नेस्ले की चाकलेट नहीं खाता, होस्टेस की पोटेटो चिप्स नहीं खाता, लिओ के खिलौने नहीं खेलता, मैंगी के नूडल्स नहीं खाता, डॉल्ट्स की आइसक्रीम नहीं खाता। पता नहीं इसे क्या बीमारी है? मैं बहुत परेशान हूँ डॉक्टर साहब।

डॉक्टर साहब भी चक्कर में। ऐसा केस पहले कभी नहीं आया था। उन्होंने बच्चे का सीना, पेट, पीठ, दाँत, मुँह, आँख, नाखून सब देख लिए। टट्टी पेशाब का रंग भी पूछ लिया। दिन में कितनी बार जाता है, यह भी जान लिया। एक्सरे ले लिया। सब ठीक था। लेकिन आसामी बड़ा था। डॉक्टर मरीज को यों ही हाथ से जाने देना नहीं चाहता था।

वह सोचता रहा, सोचता रहा। अचानक उसने पूछा–‘यह टीवी और वीडियो देखता है?’

माँ ने कहा–‘डॉक्टर साहब, मैं हड़बड़ी में यह बताना ही भूल गई कि यह टीवी और वीडियो नहीं देखता। इस बात से तो मैं सबसे ज्यादा परेशान हूँ।’

डॉक्टर ने जवाब दिया, ‘चिंता मत कीजिए। मैं इसे टीवी और वीडियो देखने का सात दिन का कोर्स देता हूँ। आपको तीसरे दिन से बच्चे की हालत में सुधार नजर आएगा।’

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