अगस्त 2026

चर्चा मेंअमृतसर में आयोजित हुआ दो दिवसीय 28वां अंतरराज्यीय मिन्नी कहानी सम्मेलन     Posted: November 1, 2022

अमृतसर: मिन्नी कहानी लेखक मंच पंजाब और पंजाब कला परिषद चंडीगढ़ द्वारा दो दिवसीय 28वाँ अंतरराज्यीय मिन्नी कहानी सम्मेलन  अखिल भारतीय पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसाइटी (रजि.) अमृतसर और त्रैमासिक ‘मिन्नी’ के सहयोग से माता मेहताब कौर हॉल, मानावाला में आयोजित किया गया।  इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों के लघुकथाकारों, आलोचकों और सहयोगियों ने भाग लिया। पहले दिन के प्रथम सत्र की शुरुआत में मंच के संयोजक हरभजन खेमकर्णी ने

अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद मंच के संरक्षक डॉ. श्याम सुंदर दीप्ति ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की और विभिन्न दिनों में आयोजित किये जाने वाले सत्रों पर प्रकाश डाला और त्रैमासिक ‘मिनी’ की 34 वर्षों की यात्रा और मंच गतिविधियों की जानकारी दी। इस के बाद लघुकथाओं पढ़ने के शुरू हुए दौर में राध्ये श्याम भारतीय करनाल, अंतरा करवड़े इंदौर, अशोक दर्द बनिखेत, सीमा भाटिया, डॉ. साधु राम लांगेआना , विवेक, गुरमीत मराड, परमजीत कौर सेखुपुरा, देविंदर पटियालवी, मनमोहन सिंह बासरके , शौकिन सिंह, सतनाम सिंह जस्सड़ , अवतार कमाल , गुरमीत रामपुरी, सुखदर्शन गर्ग, स्नेह गोस्वामी,  इंज  इकबाल सिंह, हरजीत सिंह, गुरजीत कौर अजनाला, डॉ. पुरषोतम  दुबे इंदौर, मेजर शक्ति राज कौशिक सिरसा, सुभाष नीरव दिल्ली, अजीत नबीपुरी, डॉ. हरजिंदरपाल कौर कंग , कंवलजीत भोला लंङे, जसवीर भालुरिया और रूपिंदर संधू ने अपनी-अपनी लघुकथाएं / मिन्नी कहानियाँ सुनाईं। इस सत्र के समीक्षा पैनल में सुरिंदर कैले  संपादक ‘अनु’, कांता राय भोपाल  संपादक ‘लघुकथा वृत ‘ और डॉ. शील कौशिक सिरसा ने मिन्नी कहानियों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और कहा कि अब मिन्नी कहानियों में नए प्रयोगों की आवश्यकता है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए संपादक ‘साहित्य एकम’ मैडम अरतिंदर संधू ने भी अपने प्रधानगी भाषण में उल्लेख किया कि ‘मिन्नी कहानिओं’  की लोकप्रियता बढ़ रही है और यह कम शब्दों में बड़ी बात करती  है। द्वितीय सत्र के लघुकथा पाठ पर चर्चा में डॉ. नायब सिंह मंडेर, गुरप्रीत जखवाली, डॉ. शील कौशिक, वसुधा गाडगिल इंदौर, लाजपत राय गर्ग पंचकूला, बलराम अग्रवाल दिल्ली, बूटा खान सुखी, परगट सिंह जंबर, रंजीत आजाद कांझला , सतपाल खुल्लर, सीमा वर्मा, गुरप्रीत कौर, डॉ. नवजोत कौर लवली, कांता रॉय, सुरिंदर कैले, अंजू खरबंदा, डॉ. अशोक वैरागी, मदन लाल और उषा दीप्ति ने लघुकथाओं का पाठ किया ।इस सत्र के समीक्षा पैनल में डॉ. हरप्रीत सिंह राणा, डॉ. दीपा कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ. परषोतम दुबे और अंतरा करवड़े ने लघुकथाओं और लघुकथाओं की विषय वस्तु और शैली पर टिप्पणी की और कहा कि मानवी सरोकारों को अच्छी तरह से चित्रित किया गया है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अशोक भाटिया ने मिन्नी कहानी और हिंदी लघुकथा की कई कमजोरियों पर प्रकाश डाला और कहा कि इस शैली में राजनीतिक चेतना की कमी है, जिस पर लेखकों को ध्यान देने की आवश्यकता है। तीसरे सत्र की शुरुआत प्रख्यात आलोचक डॉ. कुलदीप सिंह दीप के पेपर ‘पेशकारी दा हुनर’ के साथ हुआ। जिसे लेखकों  ने ध्यान से सुना। डॉ दीप ने मंच पर रचनाओं को प्रस्तुत करने के बिन्दुओं को समझाया और प्रस्तुतीकरण के संबंध में कई पहलुओं पर बात की। इसके बाद लघुकथाएं पढ़ने के दौर में महिंदरपाल बरेटा , सोमा कलसियां, जगदीश राय कुलरियाँ , राजिंदर रानी, ​​संदीप सोखल बादशाहपुरी, मंगत कुलजिंद  अमेरिका, डॉ. श्याम सुंदर दीप्ति, कैलाश ठाकुर, सुरजीत सिंह जीत, जोगा सिंह धनोला, हरभजन सिंह खेमकर्णी, अशोक भाटिया, कुलविंदर कौशल, दर्शन सिंह बरेटा और गुरसेवक सिंह रोडकी ने रचनाएँ पढ़ीं। जिस पर आलोचक पैनल में शामिल विद्वान डॉ. बलराम अग्रवाल, डॉ. नायब सिंह मंडेर  और डॉ. भवानी शंकर गर्ग ने बोलते हुए मिन्नी कहानी  विधा  की सूक्ष्मताओं को उठाया और कहा कि अब अकादमिक संस्थाओं  को इस विधा  पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने डॉ. दीप के पेपर के बारे में भी बहुमूल्य बातें कीं। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. दीप ने की । कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत पिंगलवाड़ा संस्थान के वार्डों में भ्रमण के साथ हुई। लेखकों ने पिंगलवाड़ा संगठन द्वारा किए जा रहे जनकल्याण कार्यों को जाना और समझा। इसके तुरंत बाद शुरू हुए पहले सत्र में प्रो. गुरदीप ढिल्लों ने ‘पहुंचे हां किस मुकाम ते’ मिन्नी कहानी के संदर्भ में पेपर पढ़ा और पचास साल की पंजाबी मिन्नी कहानी  की यात्रा और इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि इस विधा  पर और काम करने की जरूरत है। उन्होंने मिन्नी कहानी  के ऐतिहासिक मॉडल को केंद्र में रखते हुए इस विधा  के बारे में कई बिंदु उठाए। जिस पर  चर्चा करते हुए डॉ. संदीप राणा व डॉ. नायब सिंह मंडेर ने उन बिंदुओं पर विस्तार से बताया। डॉ अशोक भाटिया ने ‘पंजाबी और हिंदी मिन्नी कहानियों के बीच तालमेल ‘ के विषय पर बात की और कहा कि हिंदी लघुकथाएँ भी पंजाबी मिन्नी कहानिओं से कई बार सीखती  हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मिन्नी  कहानी में जिस तरह का सांगठनिक कार्य हो रहा है, उस तरह के प्रयासों  की हिंदी में कमी है।  इस पर चर्चा करते हुए लघुकथा कलश के संपादक योगराज प्रभाकर और सुभाष नीरव  ने कहा कि हिंदी की तुलना में पंजाबी मिन्नी  कहानियाँ ही उन्हें समान प्रतिस्पर्धा दे रही हैं। किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में ऐसा नहीं है।उन्होंने पंजाबी और हिंदी में किए गए अनुवाद कार्यों का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम का अंतिम सत्र पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह था। जिसमें डॉ. इंद्रजीत कौर मुख्य सेवादार पिंगलवाड़ा मुख्य अतिथि और डॉ. लखविंदर जौहल महासचिव पंजाब कला परिषद, डॉ. मनजिंदर सिंह प्रमुख पंजाबी विभाग गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, डॉ. हरजिंदर सिंह अटवाल साहित्य संपादक दैनिक नवां जमाना और सुरिंदर सिंह सुन्नर संपादक ‘अपनी आवाज’ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर संबोधित करते हुए बीबी इंद्रजीत कौर ने लेखकों से समाज का मार्गदर्शन करने वाली रचनाएं लिखने  की अपील की। लेखकों और बुद्धिजीवियों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए उन्हें स्वस्थ, नैतिक मूल्यों वाले समाज के निर्माण में शामिल होना चाहिए। उन्होंने पिंगलवाड़ा संगठन की तरफ से  किए जा रहे कार्यों और साहित्यिक क्षेत्र के बारे में भी विस्तार से बताया। डॉ लखविंदर जौहल  ने कहा कि वह शुरू में इस विधा  से जुड़े थे और प्रभावित भी थे। उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम में लेखकों को शामिल देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि लघुकथा एक ऐसी विधा है जो पाठक को वर्तमान समय में बांधे रखती है। डॉ. हरजिंदर सिंह अटवाल ने नवां जमाना के माध्यम से मिन्नी  कहानी विधा के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस विधा में संभावनाएं हैं और नए लेखकों का भी रुझान इसकी ओर है। श्री सुरिंदर सिंह सुन्नर ने कहा कि मुझे मिन्नी  कहानियां पढ़ना अच्छा लगता है। खासकर इस छोटी सी रचना में एक बड़ा संदेश है। डॉ मनजिंदर सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र में अकादमिक हलकों द्वारा किए जाने वाले आवश्यक कार्य नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर शोध कार्य करवा कर  इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद पुस्तक विमोचन में त्रैमासिक  ‘मिन्नी‘ का अंक 136, सुकेश साहनी दीआँ चोणवीयाँ मिन्नी कहाणीयाँ (अनु: योगराज प्रभाकर), डॉ. अशोक भाटिया दीआँ चोणवीयाँ मिन्नी कहाणीयाँ (अनुः योगराज प्रभाकर), होना एक शहर का ( लघुकथा संग्रह : स्नेह गोसवामी ), त्रैमासिक ‘मेला‘ का नया अंक (संपादकः राजिंदर मांझी), त्रैमासिक ‘छिन’ का नया अंक (संपादक त्रिपत भट्टी, हरप्रीत सिंह राणा, दविंदर पटिआलावी ), सोन सवेरा (कहानी संग्रह : सुरिंदर कैले), प्रो रूप देवगुन दीआँ चोणवीयाँ मिन्नी कहाणीयाँ (अनु : जगदीश राय कुलरियाँ) डॉ श्याम सुन्दर दीप्ति समीकक्षों  के आईने में ( संपादक : जगदीश राय कुलरियाँ), ‘पल जो यूँ गुज़रे’ (उपन्यास : लाजपत राय गर्ग), त्रैमासिक शब्द त्रिंजन (संपादक मंगत कुलजिंद), मिट्टी के जाये ( लघुकथा संग्रह : सं: डॉ दीप्ति और कुलरियाँ , अनुवाद योगराज प्रभाकर ) , मासिक ‘अपनी आवाज़ ‘ (स: सुरिंदर सिंह सुन्नर, डॉ लखविंदर जोहल), अंध विश्वास : रोग और इलाज (डॉ अशोक भाटिया) ,  ‘सिसक्दियाँ हवावां (ग़ज़ल संग्रह : हरभजन खेमकरनी ), सूहे फुल्लां दियां पत्तियां (विचार संग्रह : दर्शन बरेटा ) और अन्य  पुस्तकों को लोकार्पण किया गया और गुरबचन सिंह कोहली यादगारी मिन्नी कहानी सहयोगी पुरस्कार – जसपाल सिंह पाली अमृतसर, गुलशन राय यादगारी मिन्नी कहानी सर्वोत्तम पुस्तक पुरस्कार – मिन्नी कहानी संग्रह ‘ज़िंदगी की वापसी’ के लिए दर्शन सिंह बरेटा , अमरजीत सिंह सरीह  एएसआई यादगारी मिन्नी कहानी आलोचक पुरस्कार- प्रो गुरदीप सिंह ढिल्लों , माता महादेवी कौशिक यादगारी मिन्नी कहानी स्त्री लेखिका पुरस्कार – डॉ हरजिंदरपाल कौर कंग, श्री गोपाल विन्दर मित्तल यादगारी मिन्नी कहानी खोज पुरस्कार- डॉ नायब सिंह मंडेर और श्री राजिंदर कुमार नीटा यादगारी मिन्नी कहानी युवा लेखक पुरस्कार-बूटा खान सुखी को प्रदान किये गए ।’लघुकथा कलश’ पत्रिका के सहयोग से पहली बार शुरू किये पुरस्कारों में श्री रोशन फूलवी यादगारी मिन्नी कहानी लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार इस बार मिन्नी कहानी के क्षेत्र में जीवन भर के योगदान को देखते हुए डॉ श्याम सुन्दर दीप्ति जी को प्रदान किया गया । जब कि रवि प्रभाकर लघुकथा स्मारक पुरस्कार-डॉ पुरषोतम दुबे इंदौर और श्रीमती उषा प्रभाकर लघुकथा पुरस्कार -भोपाल कि लेखिका श्रीमती कल्पना भट्ट को प्रदान किये गए । 32वे मिन्नी कहानी  प्रतियोगिता के विजेताओं में  सोमा कलसियां ने प्रथम, रूपिंदर संधू ने द्वितीय, सीमा वर्मा ने तृतीय और रमनदीप कौर रम्मी व हीरा सिंह तूत को उत्साहित पुरस्कार से सम्मानित किया। दो दिवसीय इस आयोजन में सुखजीवन, बलविंदर सिंह भट्टी, डॉ. प्रशोतम लाल, हरिंदर पाल सिंह, योगेश कुमार, यादविंदर सिंह सिद्धू, प्रयास दीप्ति, सरदुल सिंह चहल, दलजीत सिंह कोहली, मनजीत सिंह सैनी, मलकीत सिंह जीरा, प्रेम कुमार गर्ग, अमन, गुरमन संधू आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन जगदीश राय कुलरियाँ ने किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण महेंद्रपाल बरेटा द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया। आयोजन को सफल बनाने में पूरे मिन्नी  परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। कुलविंदर कौशल और गुरसेवक रोड़की ने सभी का धन्यवाद किया।अखिल भारतीय पिंगलवाड़ा सोसायटी द्वारा भोजन, आवास और कार्यक्रम प्रबंधन की व्यवस्था काबिले तारीफ थी।

-जगदीश रॉय कुलरियाँ

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