अगस्त 2026

देशअपनों से निकलकर     Posted: May 1, 2020

सामने साफ सफेद कपड़ों में लकदक बैठे शर्मा जी को देखकर उसके हाथ अपने आप जुड़ गए। शर्मा जी ने एक निगाह उस पर डाली फिर उसके साथ आए हरिराम मिस्त्री की ओर सवालिया निगाह से देखा। हरिराम ने उसकी ओर इशारा करके कहा, ‘‘मालिक,ये  मनकू है। मेरे साथ काम करता है। इसे चार सौ रुपयों की सख़्त जरूरत है। महीने दो महीने बाद लौटा देगा। जो ब्याज बट्टा लगाना हो लगा लीजिए। बड़ा ईमानदार है। तभी तो मैं इसके साथ सिफारिश करने चला आया हूं। जिम्मेवारी मेरी रहेगी।’’

          शर्मा जी ने उसकी ओर फिर से सिर से पाँव तक देखा, फिर बोले, ‘‘क्या जरूरत पड़ गई इसे…’’

          जवाब में  मनकू ने कहा, ‘‘मेरे भाई के लड़के का बर्डे है। बहुत बड़ा अफसर है मेरा भाई। शान विहार में कोठी है उसकी। बहुत  बड़ी पार्टी दे रहा है वो अपने बच्चे के जन्मदिन पर। अब मैं गरीब मजदूर सही, पर हूँ  तो बच्चे का चाचा। मुझे तो पार्टी में वो बुलाएगा ही। अब पार्टी में शामिल होऊँगा तो कुछ ना कुछ बड़ी भेंट तो देनी ही होगी। आप इत्मीनान रखें मैं जल्दी ही पैसे लौटा दूँगा…’’

          ‘‘कौन है तुम्हारा भाई जो बर्थ-डे मना रहा है?’’

          ‘‘मैं सुखीराम का भाई हूँ । बड़े दफ्तर में डिप्टी डरेक्टर हैं….’’

          ‘‘हूं तो तुम सुखराम के भाई हो….?’’

          ‘‘आप जानते हो उन्हें?…..

          जवाब में शर्मा जी ठहाका मारकर हँसने लगे। कुछ समझ नहीं आया मनकू को।

          अपनी हँसी पर किसी तरह काबू पाकर शर्मा जी ने कहा, ‘‘मैं भी कहूं इसका भाई इतना बड़ा अफसर कैसे? हा..हा, वो शैड्यूल कास्ट से बिना योग्यता अफसर बन गया। खैर…ऐसा है भाई। फिर तो तुम्हें मुझसे पैसे उधार लेने की कोई जरूरत नहीं….’’

          ‘‘क्यों?’’ दोनों ने एक साथ पूछा।

          ‘‘इसलिए कि सुखराम अपने बच्चे का बर्थ-डे दो दिन पहले ही मना चुका है। तुम्हें तारीख ठीक से याद नहीं होगी। मुझे उस बर्थ-डे पार्टी में न्यौता देने वो खुद आया था। अब हम ठहरे पंडित,थोड़ा बहुत जात-पात तो देखना पड़ता है। मैं तो उसके बुलाने के बावजूद नहीं गया।…’’

          एकाध क्षण चुप रहने के बाद शर्मा जी ने हँसते  हुए कहा, लगता है उसने तुम्हें छोटा आदमी समझकर नहीं बुलाना चाहा होगा और तुम हो कि कर्ज लेकर…

          शर्मा जी की कोठी से बाहर निकलते हुए मनकू सोच में पड़ गया था, जिसे बुलाया वो आए नहीं और जो आना चाहते थे उन्हें बुलाया नहीं….कहीं ऐसा ना हो सुखराम भाई एकदम अकेले पड़ जाएँ …।

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