अरविन्द के पाँव इतनी भारी कभी न हुए, उसे पहली बार अपने ही घर की चौदह सीढ़ियों ने चौदह-चौदह बार शिकस्त दी। एक-एक पायदान की अपनी-अपनी जिद। घर के बरामदे में घुसते ही उसकी कँपकँपी छूट गई। उफ! वह बरामदे पर असहाय -से पड़े सोफे पर धँस गया। एक तरफ बैग लुढ़काया और जुराबे उतारने लगा।
‘‘शीला! ठंड बढ़ गई है, क्या?’’
‘‘नहीं, तो। ऐसी में भी आराम नहीं मिलता, यार!’’ पत्नी बिना नजर उठाए बोली, वह वाट्स ऐप पर पूरे लग्न के साथ समर्पित दिखी।
अरविंद ने टाई नॉट ढीली की, तो उसका बाँया हाथ बरबस उसके माथे से चिपक गया, वह घबड़ाया, “माथे में गरमी और देह में ठिठुरन!’’
‘‘दफ्तर में बिज़ी रहते हो, उम्र चालीस पार कर रही है, स्टेमिना तो घटेगा। कितनी बार कहा कि पावर बूस्टर एन्स्योर आनलाइन ऑर्डर करो, रिवाइटल रोज लिया करो, पर सुनोगे!’’ पत्नी का उपालंभ उसे नाजायज नहीं लगा। अरविन्द ने बाथरूम से आकर तौलिए में हाथ रगड़ते हुए दोनों कमरों में झाँकभर लिया, ‘‘यार शीला! उद्भव और आलिया की एग्जाम्स हैं, जब देखो ये दोनों मोबाइल में रमे रहते हैं।’’
‘‘वे दोनों ऑनलाइन क्लास करते हैं। कभी दोस्तों से चैटिंग कर ली, तो बुरा क्या है! फ्रीज में दाल और सब्जी है, हॉट-पॉट में रोटियाँ, सलाद तो खाते नहीं। तुम्हारा ही हिस्सा है। हमलोगों ने जोमैटो से बर्गर मँगवाया था।’’ पत्नी स्वयं न उठी।
अरविन्द ने रोटी का निवाला मुँह में बढ़ाया और दूसरे हाथ से मोबाइल निकाल लिया। वाट्सएप , फेसबुक, मैसेंजर..एक-एक कर सभी तक आया-गया।’’ शीला! पता है, मेरे फालोवर ट्वीटर और इंस्टाग्राम पर कितने-कितने है?’’ उसके सवाल में पत्नी की कोई रुचि नहीं थी। अरविन्द ने थाली उठाई और मोबाइल लिये हुए वाशबेसिन तक चला गया।
फोन की घंटी घनघनाई।’’ अमा यार’’ उसने आँखें बंद किए हुए रिसीव किया,’’ हाँ, धीरज रखो, मिश्रा जी। ऐसी बीमारियाँ आती-जाती रहती हैं।’’ कहकर उसने फोन काट दिया। करवट बदली, पत्नी लेटे-लेटे कोई पोस्ट लिख रही थी। वह बाथरूम जाने के लिए उठा, तो उसके मुँह से निकल गया ‘‘शीला ! ये ल्यूकिमिया क्या है? नरोत्तम मिश्रा का फोन था। उसके बेटे को हुआ है।’’ उसने गूगल की ओर हाथ बढ़ा दिया।
अरविन्द की आँखें घबड़ाकर उलट गईं, उसने दौड़कर एसी बंद किया-“शीला ! ल्यूकीमिया ब्लड कैंसर है। मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से होता है।’’
पत्नी खीझकर पलंग से उतर गई, “तुम पगलाकर मरो, मैं आलिया के कमरे में सोने जा रही हूँ।”
अरविन्द बेचैनी से उठा, “अरे, उद्भव ! तेरा भी वेट लॉस हुआ है? वाच किया क्या?’’
बेटे ने उसे खीझकर देखा, पापा को क्या मालूम कि विडियोगेम में कितना रिस्क होता है! अरविन्द आईने की ओर भागा, फिर बेटी के कमरे तक पहुँच गया, “अरी, आलिया! बेटा तुम्हारा चेहरा फेसपैक के कारण ऐसा उजला है, या किसी और कारण से! जरा विकिपीडिया में देखो, तो अर्बुद क्या है?’’
इस बार पत्नी उठी, उसने अरविन्द को नींद की एक गोली और एक गिलास पानी थमाकर अपना कर्त्तव्य निभा लिया।
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