जलतरंग : ज्योति जैन ( मराठी अनुवाद: सुषमा प्रदीप मोघे)
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नुवाद कला की सृजनशीलता का उदाहरण है जलतरंग
एक भाषा से दूसरी भाषा में रचनाओं का अनुवाद मात्र शाब्दिक नहीं वरन भावनात्मक होता है और यह अपने आप में एक सृजन के समानांतर है। यह मात्र विधा ही नही संपूर्ण साहित्यिक परिदृश्य को उच्च स्तर प्रदान करने वाला उपक्रम है।
उक्त विचार श्रीकांत तारे द्वारा सुषमा मोघे द्वारा हिंदी से अनूदित लेखिका ज्योति जैन के लघुकथा संग्रह जलतरंग के विमोचन के अवसर पर व्यक्त किए।
अपने मन की बात कहते हुए अनुवादिका सुषमा मोघे ने अपने परिवार व शुभचिंतकों को धन्यवाद देते हुए दोनों भाषाओं के प्रति अपने प्रेम और सृजनात्मकता को एक समृद्ध सेतु के रुप में चित्रित किया।
वामा साहित्य मंच के इस कार्यक्रम में लेखिका ज्योति जैन ने मराठी में अपने वक्तव्य के दौरान भाषाओं को आपस में जोड़ने वाली सखि्याँ और सांस्कृतिक आदान प्रदान का प्रमुख तत्त्व बताया। आपने कहा कि कुछ सीखना हमेशा हमें विनम्र बनाए रखता है और भाषा के साथ हम सृजनशील बने रहते हैं।
पुस्तक पर चर्चा करते हुए अंतरा करवड़े ने हिंदी लघुकथा संग्रह जलतरंग की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए इसकी विषयवस्तु व रचनाओं को, तेरह वर्षों के पश्चात आज भी प्रासंगिक बताया। अनूदित संस्करण पर बोलते हुए आपने सांस्कृतिक सृजनशीलता के साथ इसे हिंदी से मराठी में साहित्यिक शुभ प्रवेश कहा।
कार्यक्रम के शुभारंभ सरस्वती वंदना प्रस्तुत की भारती भाटे ने, रेयांश मोघे द्वारा अतिथियों का स्वागत करने के पश्चात स्वागत उद्बोधन दिया गया। कार्यक्रम में अतिथी परिचय दिया वैजयंती दाते व शैला अजबे ने। इस अवसर पर वंदना पुणतांबेकर ने उत्कृष्ट मंच संचालन किया। आभार प्रदर्शन किया पूजा मोघे ने।