घर में देवरानी-जेठानी की कलह यहाँ तक बढ़ गया कि बड़े भाई ने न चाहते हुए भी छोटे के लिए अलग मकान खरीदना पड़ा। उसे डर था कि कहीं रोज-रोज की कलह से कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
माँ-बाप की मृत्यु के बाद बडे़ भाई का छोटे के प्रति दायित्व और बढ़ गया था।
जेठानी ने पति से पूछा, ‘‘कहाँ लिया मकान ?’’
‘‘…… बहूत दूर है…….उसका मकान…..’’ इतना कहते हुए उसकी आवाज भर्रा गई और आगे वह कुछ न कह सका।
अगले दिन उसकी पत्नी ने न जाने कहाँ से पता लगवा लिया उस खरीदे गए मकान का।
पति के घर आते ही उस पर बरसते हुई बोली, ‘‘ये दो गली छोड़कर ही खरीद लिया मकान…..हाँ.हाँ… हमारी छाती पर दलवानी थी मूँग……’’ वह अनाप-शनाप बके जा रही थी।
बड़ा भाई चुप था ;क्योंकि उसे तो यह दूरी भी मीलों जैसी लग रही थी।
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अक्तुबर 2026
संचयनदूरी Posted: March 1, 2015
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