जुलाई 2026

भाषान्तरजन्नत में संवाद/ जन्नत माँ बात     Posted: September 1, 2023

गढवाळि अनुवाद: डॉ. कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

“मि तैं जन्नत म सबसे बडू बंगला अर एक दर्जन हूर मिलीं चैंदिनI”

“किलै?”

:मि 72 काफ़िरू तैं मारिक आयूँ छौं। मिन काफिरू तैं मान्न्नौ तैं अपणि जान क़ुर्बान करि।

“काफ़िर कु छा?”

“क्य मतलब?”

“काफ़िर ईंट ढुंग क छा या घास-फूस?”

“जी, काफ़िर आदिम छा।“

“उ कैन बणै छा?”

“जी सब अल्ला का बणाया छा। उ बी अल्ला न बणाई छा।“

“जै तैं अल्लाह न बणाई छौ वे तैं मान्नौं कु तुम तैं क्या हक़ छौ?”

“ज…ज..जी…”

“अल्ला क बन्दों तैं मान्ना का बाद तुम तैं क्या मिल्यूं चैन्दू?”

“ज उँन त हम तैं ई बतै छौ कि काफिरू तैं मारिक जन्नत मिलदीI”

“त जा उँ से ही जन्नत ली ल्यावा…

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