मेरे अंगने मे तुम्हारा क्या काम है….., सज रही अरे तेरी अम्मा सुनहरी कोठे पे…वृहन्नलाओं के कर्कश स्वरों ने तन्द्रा भंग की।
मेरे पड़ोस मे तिवारी जी की पत्नी का देहान्त हुआ था ।श्मसान से लौटकर सर यूँ भी भारी होता है, हम लोग नहा धोकर लेटे ही थे ।अभी हमें शमशान से वापस आये घण्टा ही बीता होगा कि ढोल -ढमाल के साथ फ़िल्मी धमाल से तन्द्रा टूटी। तिवारी जी के घर के ठीक सामने एक परिवार के घर एक दो दिन पू्र्व पुत्र जन्म हुआ था वहीं वृहन्नलाजन धूम मचाए हुए थे। मैं ताव न ला सका हाथ में अपनी फ़ौजी केन लेकर निकला और वृहन्नलाओं पर टूट पड़ा। एक मिनिट में सब घरों के अन्दर ।
वृहन्नला प्रमुख को समझ न आया बोला- सॉब सॉब क्या बात है क्या हुआ।
मैने मन अशान्ति का कारण बताया-सामने घर मे मैय्यत हुई है। तुम लोग धाल धमाल कर रहे हो शर्म नही आती?
बन्दा अवाक्, सॉब पता नही था, वरना हम आते ही नहीं। उसने उस परिवार प्रमुख को आवाज़ लगाकर बाहर बुलाया। काफ़ी लानत- मलामत की-,हमें तो पता नहीं था पर आपको तो सोचना था | पड़ोसी के दुःख में शरीक न होना शर्म की बात है , यह कहकर उसने उनसे मिले पैसे वापस के और वे लोग माफ़ी मॉगकर चले गए।
-0- कर्नल डॉ .गिरिजेश सक्सेना ‘गिरीश’ ,जी-1, इन्द्रप्रस्थ – सनसिटी एयरपोर्ट रोड, भोपाल-462030
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